वसंत पंचमी से शुरू हुआ ब्रज में होली का उल्लास माघ पूर्णिमा पर परवान चढ़ गया। रविवार को मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर में ढप का पूजन किया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर होली के रंगों से सतरंगी हो गया। वहीं बरसाना के लाडलीजी मंदिर (श्री राधारानी मंदिर) में समाज गायन के साथ रंग-गुलाल उड़ाया गया। राधाकुंड, वृंदावन, गोवर्धन में भी होली का धमाल शुरू हो गया है।
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द्वारिकाधीश मंदिर में ढप बजाते रसिया मंडल के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
द्वारिकाधीश मंदिर में रसिया गायन द्वारकेश रसिया मंडल के संरक्षक चुन्नीलाल चतुर्वेदी, धीरेंद्र चतुर्वेदी पारा, छोटेलाल चतुर्वेदी पंडाजी ने विधि-विधान से मंदिर परिसर में रखे ढप का पूजन किया। इसके बाद मंदिर में प्रसाद रूपी गुलाल उड़ाया गया। द्वारिकाधीश मंदिर में होली की वसंती बहार में सराबोर होकर श्रद्धालु जमकर नाचे। भक्त अपने आराध्य के प्रसादी स्वरूपी गुलाल को शरीर पर डलवाकर धन्य हो गए।
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ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
द्वारिकाधीश मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि सोमवार को पड़वा के बाद से ठाकुर द्वारिकाधीश को ढप पर होली के रसिया सुनाए जाएंगे। सुबह राजभोग के दर्शन के बाद ठाकुरजी के समक्ष होली का गायन का क्रम भी शुरु किया जाएगा जो होली तक जारी रहेगा। प्रमुख रूप से रंगभरनी एकादशी और ठाकुरजी का डोल महोत्सव मनाया जाएगा।
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श्रीजी मंदिर में होली की धूम (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विश्व प्रसिद्ध बरसाना की लठामार होली की महिमा ही निराली है। वृषभान भवन में होली की मस्ती ब्रजवासियों के साथ देश-विदेश से आए भक्तों पर होली की खुमारी चढ़ने लगी है। राधारानी मंदिर में प्रतिदिन पांच से छह बजे तक अबीर-गुलाल रूपी वर्षा और रसिया गायन के मध्य श्रद्धालु होली की मस्ती के सागर में गोते लगाते नजर आ रहे हैं।
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राधारानी मंदिर में रसिया गायन करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
माघ पूर्णिमा पर लाडलीजी महल में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर के सेवायत रासविहारी गोस्वामी ने बताया कि वसंत के बाद प्रतिदिन शाम को पांच से छह बजे तक होली के पद समाज द्वारा गायन होता है। शिवरात्रि के दिन होली की प्रथम चौपाई के बाद होली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता है।
राधाकुंड में माघ मास की पूर्णिमा पर गिरिराज परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई श्रद्धालु गिरिराज महाराज के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु परिक्रमा कर रहे थे। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले मंदिर और कुंडों में दर्शन और स्नान कर दान पुण्य किया।