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भोले बाबा के प्रति आस्था में नहीं आया फर्क: चमत्कारों पर विश्वास और ऐसी स्थिति...भक्त खुद ही खिंचे चले आते हैं

Sun, 07 Jul 2024 08:13 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज डेस्क, आगरा
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भोले बाबा+ - फोटो : संवाद
 प्रेमदेवी लंबे समय से बीमार थीं, साकार हरि के शरण में आईं तो उनकी शारीरिक पीड़ा मिट गई। इसी तरह अजय के घर धीरे-धीरे स्थितियां सुधरती गईं। आज अजय के घर में किसी चीज की कमी नहीं है। प्रेमदेवी और अजय ये दो तो बानगी हैं, ऐसे कई लोग हैं जो कहते हैं कि साकार विश्व हरि (भोले बाबा) के अंदर ईश्वरीय शक्ति है, तभी तो उनकी शरण में आए व्यक्ति की पीड़ा समाप्त हो जाती है। यही वजह है कि हाथरस हादसे में 121 लोगों की मौत के बाद भी भोले बाबा के केदार नगर शाहगंज में बंद पड़े मकान पर पूरे दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी है। वहीं मंडलीय मनौवैज्ञानिक मानते हैं कि पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा जब कम होती है या दूर हो जाती है तो उसे ऐसा करने वाले बाबाओं के चमत्कार पर विश्वास हो जाता है, उनका यह विश्वास आस्था में बदलते ही ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है।



 
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नारायण साकार हरि भोले बाबा - फोटो : संवाद
भोले बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा के पास चमत्कारी शक्तियां हैं जो लोगों को उनकी पीड़ा, परेशानी, दुख और समस्याओं से मुक्ति दिलाती हैं। शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे भी साकार विश्व हरि के आवास पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी थी। जिस वक्त यह संवाददाता उनके आवास पर पहुंची, करीब 24-25 साल का एक युवक भोले बाबा के मकान की सीढि़यों पर सिर झुकाए बैठा था। करीब दो मिनट तक आंख बंद करके वो कुछ बुदबुदाता रहा और फिर गेट पर माथा लगाकर वापस जाने लगा।



 
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सत्संग करता नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा।
युवक का नाम अजय था और वह पास की ही कॉलोनी का निवासी था। उसने बताया कि 2008 में जब घर की आर्थिक हालात बिगड़े तो रोटी तक के लाले पड़ गए। ऐसे में मम्मी को किसी ने बाबा के विषय में बताया तो मम्मी यहां आने लगीं। बाबा के आशीर्वाद से पापा का काम चल निकला। मेरा जूते का कारखाना है और भाई की पुलिस में नौकरी लग चुकी है। सब साकार विश्व हरि की कृपा है।

 

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Hathras Stampede - फोटो : पीटीआई
इसी प्रकार बाबा के दर्शन के लिए आईं 70 वर्षीय प्रेमदेवी ने बताया कि सालों से अपने स्वास्थ्य से परेशान थीं। सब जगह इलाज कराने के बाद बाबा की शरण में आईं तब से शारीरिक समस्या नहीं है। प्रेमदेवी के साथ आईं एक अन्य महिला भक्त ने बात करने से इन्कार कर दिया। वो सिर्फ इतना बोलीं की हम तो यहां आते रहते हैं, सत्संग में हाथरस भी गए थे और बाबा की कृपा से बिल्कुल ठीक सामने खड़े हैं।

 
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
केदार नगर स्थित बाबा की कॉलोनी निवासी 37 वर्षीय बॉबी दिवाकर ने बताया कि जब वो स्कूल में पढ़ते थे तो बाबा यहीं इसी घर में रहते थे। उनके घर में उनकी पत्नी और एक भतीजी भी साथ रहती थी जो तुलसी देवी इंटर कॉलेज की छात्रा थी। बाबा सुबह शाम अपने बजाज स्कूटर से ड्यूटी करने जाते थे और उनकी दिनचर्या सामान्य इंसानों जैसी ही थी।

 
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
बॉबी के साथ ही स्थानीय लोग बताते हैं कि मंगलवार को भक्तों की ज्यादा भीड़ जुटती है। हर रोज शाम 4 बजे भी कुछ भक्त नियमित दर्शन के लिए आते हैं। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक डॉ. साहब सिंह कहते हैं कि इस आस्था और धर्म का तर्क से कोई संबंध नहीं होता। किसी भी बाबा को मानने वालों के चेतन और अवचेतन मन में यह बात बैठ चुकी होती है कि बाबा ही सारे दुखों का अंत कर सकते हैं। उनके चमत्कारों पर विश्वास हो जाता है। जो बच्चे बचपन से घर में बाबाओं आदि के प्रति आस्था देखते हैं वो स्वत: ही इनके अनुयायी बन जाते हैं। परिस्थितिवश अगर किसी समस्या का समाधान हो जाए तो फिर ये अनुयायी अंधभक्त में तब्दील हो जाते हैं। इस स्थिति में इनकी आस्था और विश्वास को बदलना नामुमकिन सा है।
 
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