इस बार गुप्त नवरात्रि 12 फरवरी से शुरू हो रहे हैं। इस बार नौ नहीं दस दिन के गुप्त नवरात्रि होंगे। आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश ज्योतिष व विद्वत परिषद, ने बताया कि वर्ष में कुल चार नवरात्रि हैं, चैत्र, आश्विन के नवरात्रि उजागर होते हैं, जिनकी सर्वत्र मान्यता है। दो नवरात्रि आषाढ़ और माघ माह में आते हैं, जिन्हें गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। ये यन्त्र, तंत्र व मंत्र सिद्धि के लिए जाने जाते हैं। आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि इस वर्ष माघ शुक्ल प्रतिपदा 12 फरवरी शुक्रवार से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जो नौ नही बल्कि दस दिनों के है। माघ माह की गुप्त नवरात्रि का समापन 21 फरवरी रविवार को होगा।
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घट स्थापना के साथ हुई माता की आराधना
- फोटो : श्ााहजहांपुर उत्तर प्रदेश्ा
माघ माह के गुप्त नवरात्रि धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग व किंस्तुघ्न करण में प्रारम्भ हो रहे है। कुम्भ राशि का चन्द्रमा, मकर राशि का सूर्य व मकर के गुरु में घटस्थापना होगी। घटस्थापना के दिन शनि, गुरु, सूर्य, शुक्र व गुरु की पंचग्रही युति भी रहेगी। वहीं सूर्य सुबह शनि की राशि में गोचर करेंगे तो रात्रि 9.11 पर राशि परिवर्तन कर शनि की ही कुम्भ राशि मे प्रवेश करेंगे।
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मां सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
विद्यर्थियों के लिए कुछ खास है
यह नवरात्र, माघ माह की नवरात्र सरस्वती आराधना के लिए विशेष है। 16 फरवरी को सरस्वती जयंती, वसंत पंचमी है। मां सरस्वती की साधना का महान पर्व श्रीपंचमी को अहर्निश शुभ योग निर्मित हो रहा है, जिससे यह पर्व विद्या अध्ययन के लिए खास बना हुआ है।
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नवरात्र
- फोटो : अमर उजाला
माघ माह की नवरात्रि इस वर्ष विशेष योग संयोग में मनेगी
वैसे तो नवरात्रि अपने आप मे विशेष ही होती है, लेकिन इस वर्ष माघी गुप्त नवरात्रि नौ के बजाय 10 दिन की है। नवदुर्गा के साथ दश महाविद्या की कृपा प्राप्त होगी। इस नवरात्रि में छठ तिथि की वृद्धि होने से ये नवरात्रि पूरे 10 दिनों के है। 17 फरवरी बुधवार और 18 फरवरी गुरुवार को दोनों दिन षष्ठी तिथि रहेगी।
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इसलिए भी यह नवरात्रि विशेष है
13 फरवरी को देवराज गुरु पूर्व में उदित होंगे तो 14 फरवरी शुक्र अस्त होंगे। 16 फरवरी वसंत पंचमी को इस वर्ष विवाह नही हो सकेंगे। वसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में आता है। लेकिन इस वर्ष पंचमी को शुक्र का तारा अस्त होने से विवाह आदि मंगल कार्य नहीं हो सकेंगे। विवाह में शुक्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। शुक्र काम जीवन का कारक माना जाता है। इसके अस्त होने से विवाह का क्या औचित्य रह जाता है। इसलिए शुक्र के अस्त होने से वसन्त पंचमी पर विवाह नहीं हो सकेंगे।
पंडित आचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक
- फोटो : अमर उजाला
सामान्यतः गुप्त नवरात्रि साधना व उपासना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। माघी गुप्त नवरात्रि सरस्वती साधना, उपासना के साथ ही यंत्र, तंत्र व विशेष मंत्रों की सिद्धि के श्रेष्ठतम काल कहे गए हैं। इनका उपयुक्त काल है अभिजीत (मध्यान्ह) व महानिशा काल (अर्द्ध रात्रि) शुद्धता व पवित्रता से अपने इष्टदेव की साधना व मां भगवती की कृपा से ही यह सम्भव है। गुप्त नवरात्रि में दुर्गासप्तशती व नवार्ण मंत्र साधना से भगवती की असीम कृपा प्राप्त होती है। चारों नवरात्र में घट स्थापना, सात्विक विचार, शुद्धता, पवित्रता, उपवास आदि की प्रमुखता होती है।