ताजनगरी में गणेश चतुर्थी को लेकर मंदिरों के साथ घर-घर में पूजा-पाठ की तैयारी चल रही है। सोमवार को गणपति को विराजमान करने के साथ दिन-रात उनकी सेवा की जाएगी। लड्डुओं का भोग लगाकर उनका गुणगान किया जाएगा। श्रद्धालुओं ने गणेश प्रतिमा, पूजन सामग्री आदि की खरीदारी कर रहे हैं।
गणेश प्रतिमा को अंतिम रूप देता कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
पुराणों के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश का जन्म हुआ था। प्रतिमा की स्थापना के बाद श्रद्धालु उनकी उपासना करेंगे। शहर में जगह-जगह पंडाल सजाए जाएंगे। वहां दिन भर धार्मिक आयोजन होंगे। साथ ही श्रद्धालु घरों में भी गणेश जी को लाएंगे।
गणेश प्रतिमा स्थापना का शुभ मुहूर्त
सुबह - 06.22 से 07.30 बजे तक
सुबह - 09.00 से 10.30 बजे तक
दोपहर - 03.50 से 05.00 बजे तक
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गणेश प्रतिमा को सजाता कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार, पीले वस्त्र पर चावल का स्वास्तिक बनाकर उस पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर पंचोपचार व षोड्षाचार पूजन करें। भगवान गणेश जी को विशेष रूप से हरी दुर्वा चढ़ाएं, घी का दीपक जलाएं। मोदक, पंच मेवा, पांच फलों का भोग लगाएं। नारियल, तांबुल व कमल गट्टे, सुपारी व लौंग इलायची आदि चढ़ाएं।
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गणेश प्रतिमा को अंतिम रूप देता कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
गणेश चतुर्थी के तीसरे, पांचवें और सातवें दिन प्रतिमा को यमुना जी में विसर्जित करते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणेश चौदस को भी प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। वहीं सिद्ध विनायक मंदिर, गोकुलपुरा मंदिर में रंग-रोगन किया गया है।
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गणेश प्रतिमा ले जाते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के महंत ज्ञानेश शास्त्री ने बताया कि गणेश चतुर्थी को मंदिर में भव्य फूल बंगला सजेगा। शाम को शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग शामिल होंगे। माईथान स्थित योगमाया शक्तिपीठ मंदिर में स्थापित श्वेतार्क गणपति का भव्य शृंगार किया जाएगा। गणेश जी को मोदक का भोग लगाया जाएगा।
गणेश चतुर्थी को लेकर सुल्तानगंज पुलिया के पास बाईपास रोड पर, छिली ईंट, नामनेर, सिरकी मंडी में मूर्तियों का बाजार सजा हुआ है। खंदारी, न्यू आगरा, राजामंडी आदि बाजारों में भी दुकानें लगी हैं। सिरकी मंडी स्थित कारोबारी विनोद कुमार ने बताया कि प्रशासन की सख्ती के चलते इस बार पीओपी की मूर्तियां नहीं बनाई। मिट्टी की मूर्तियों की लागत अधिक आई है। उस हिसाब से बिक्री कम है। खरीदार पीओपी की मूर्तियों को प्राथमिकता देते हैं, वह हल्की और सस्ती होती है।