गिरिराज जी की पूजा के प्राकट्य स्थल गोवर्धन में पूजा के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। विभिन्न देशों से आए श्रद्धालुओं ने दिवाली को गिरि परिक्रमा लगाई। रात में मानसी गंगा के तट पर दीपदान किया। शुक्रवार को विदेशी भक्तों की टोलियां गौड़ीय मठ से गोवर्धन पूजा के लिए निकली तो गिरिराज नगरी आस्था और भक्ति से सराबोर हो गई। विदेशी श्रद्धालु सिर पर दूध, दही, माखन, डलियों में व्यंजन लेकर पूजा करने तलहटी पहुंचे। पूजा के बाद छप्पन भोग, अन्नकूट भोग लगाए गए। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों संग मिल इंद्र का मान मर्दन करने के लिए गिरिराज जी की पूजा की थी। शुक्रवार को उसी 5500 वर्ष पुरानी परंपरा को साक्षात किया गया। गौड़ीय वेदांत समिति के संस्थापक नारायण दास की कृपा से प्रत्येक वर्ष गिरिराज जी की पूजा होती है। इस बार शोभायात्रा भक्ति वेदांत स्वामी नर सिंह दास के सानिध्य में हरिनाम संकीर्तन के साथ निकाली गई।