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बाढ़ से हाहाकार: बीहड़ में चंबल नदी ने मचाई तबाही, दहशत में ग्रामीणों ने छोड़ा घर-वार

Tue, 17 Sep 2019 09:08 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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बीहड़ में बाढ़ से हाहाकार - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान के कोटा बैराज के 13 साल बाद सभी गेट खोलकर 6.30 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से चंबल नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। सोमवार सुबह को नदी का जलस्तर 133.50 मीटर पर पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 132 मीटर पर है। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि कई गांव जलमग्न हो गए हैं। मकान तक डूब गए हैं। दहशत के चलते तटवर्ती गांवों के लोग अपना घर-वार छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं। सोमवार डीएम एनजी रवि कुमार और एसएसपी बबलू कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। 
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बाढ़ की दहशत में गांव खाली कर रहे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
नदी किनारे के 10 गांव मऊ की मढ़ैया, गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, झरनापुरा, पुरा शिवलाल, पुरा डाल, डगोरा, उमरैठा पुरा का तहसील मुख्यालय से संपर्क टू्ट गया है। पानी से घिरे टापू बने इन गांवों में हड़कंप हुआ है। पिनाहट के गांव उमरेठा पुरा में घरों तक पानी पहुंच गया है। यहां के लोग ट्रैक्टर ट्रॉली में खाने पीने का सामान लादकर सुरक्षित स्थान पर चल गए हैं। 
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खतरे के निशाने के ऊपर बह रही चंबल नदी - फोटो : अमर उजाला
जिस तेजी से चबंल का पानी बढ़ रहा है उससे 1996 में 138 मीटर का स्तर छूने का रिकॉर्ड टूटने की आशंका ने ग्रामीणों को डरा दिया है। बाह में चंबल किनारे के 35 गांवों तक पानी पहुंच गया है। नदी और गांव से जुड़ने वाले रास्तों पर 10 से लेकर 50 फीट तक पानी भरा है। इससे मऊ की मढ़ैया, गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, झरनापुरा, पुरा शिवलाल, पुरा डाल, डगोरा, उमरैठा पुरा गांव टापू बन गए हैं। 

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चंबल नदी - फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी का जलस्तर अभी और बढ़ेगा। सिंचाई विभाग ने नदी के 134 मीटर तक पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया है। हालात पर काबू रखने के लिए हल्का लेखपाल और राजस्व निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई हैं। कई गांवों में स्थिति बेहद खराब है। ग्रामीण ऊंचे टीलों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। खाने-पीने का संकट भी गहराने लगा है। 
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चंबल नदी में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला
गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा गांव के लिए खींची गई बिजली की लाइन नदी के पानी में डूब गई है। इससे तीनों गांवों की आपूर्ति ठप हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली न होने की वजह से गेहूं आदि की पिसाई भी नहीं हो पा रही है। राशन के लाले पड़ गये है। गांव के लोग रात अंधेरे में गुजारने को मजबूर है। मोबाइल तक चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। जिससे गांव के लोग दूर शहरों में रह रहे लोगों को अपना हाल भी नहीं बता पा रहे। 
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बाढ़ में डूबी स्कूल की इमारत - फोटो : अमर उजाला
उमरैठापुरा गांव के स्कूल परिसर, कमरों में 6 फीट की गहराई तक पानी भर गया है। इमारत गिरने का खतरा पैदा हो गया है। गोहरा गांव के प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय के गेट पर पानी भर गया है। नदी किनारे के अन्य गांवों में भी स्कूलों तक पानी पहुंच गया है। कुछ के रास्ते जलमग्न है। ऐसे में पढ़ाई चौपट हो गयी है। बच्चों की बात छोड़िए, पढ़ाने वाले तक स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।   
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बाढ़ में बह गया कंटेनर - फोटो : अमर उजाला
धौलपुर और मुरैना के बीच बन रहे रेलवे पुल का 90 टन वजनी कंटेनर शनिवार को बह गया था। उसे बांध रहे शंकरपुरा गांव के 6 लोग भी बहने लगे, तो हड़कंप मच गया। कंटेनर को पकड़ने के लिए बीलपुर कुथयाना के जमुना, नब्बा, महेश, करूआ आदि नाव की मदद से फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश की। करीब 30 किमी के बहाव के बाद बाह सीमा के गांव बरसला राजाखेड़ा में आखिरकार उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। 
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टीले पर रखा एक परिवार का सामान - फोटो : अमर उजाला
चंबल के उफान से प्रभावित लोगों को विस्थापित करने के लिए 8 बाढ़ चौकियां मनसुखपुरा, पिनाहट, उमरैठा, बासौनी, सिमराई, पुरा भगवान, खेड़ाराठौर, नंदगवां में गठित की गई हैं। तहसीलदार बाह हेमचंद्र शर्मा ने बताया कि गठित बाढ़ चौकियों पर कर्मियों की नियुक्ति की गई है। संसाधन जुटाए जा रहे हैं। इसके अलावा तहसील मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। 
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