जर्मनी व अमेरिका की तकनीकी से यमुना एक्सप्रेसवे लोगों की सहूलियत के लिए बनाया गया था। इस पर चलने के लिए नियम कायदे भी तय हैं लेकिन वाहन चालक इसका पालन नहीं करते हैं। यही कारण रहा कि शुक्रवार सुबह बस चालक ने एक कार को रौंद दिया। इसमें चालक एक नहीं तीन लापरवाही बरत रहा था। नींद, तेज रफ्तार व ओवरटेक की लेन में बस चलाना ही हादसे का कारण बना। यदि बस में सवारियां होतीं तो कई की जानें चली जातीं। यमुना एक्सप्रेसवे पर उल्टे सीधे वाहनों को चलाने वाले को कोई रोकने वाला नहीं है। दिन के वक्त भी जो लेन जिसके लिए निर्धारित है, उसका पालन नहीं किया जाता है। अधिकतम रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो ओवरटेक से पहले लेन निर्धारित है। कार अगर ओवरटेक करनी है, दाहिनी तरफ डिवाइडर से सटी लेन पर ओवरटेक कर आगे निकाल सकते हैं। तीसरी लेन बसों के लिए निर्धारित है और सबसे किनारे वाली लेन पर ट्रैक्टर व धीमी गति से चलने वाले वाहन चलते हैं। लेकिन बस चालक तो ओवरटेक वाली लेन में बसों को दौड़ाते मिल जाएंगे।