देश में मुगलिया शासन के दौरान जहां सोने-चांदी के सिक्के ढाले जाते थे, फतेहपुर सीकरी की वह टकसाल अब संवारी जाएगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 48 लाख रुपये की लागत से इस टकसाल का संरक्षण कार्य शुरू करने वाला है। जनवरी से संरक्षण कार्य शुरू होगा, जिसमें टकसाल के फर्श के खराब हो चुके लाल बलुई पत्थरों को बदला जाएगा। दीवारों की मरम्मत करने के बाद यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा।
मुगलिया दौर में टकसाल थी
फतेहपुर सीकरी म्यूजियम के ठीक सामने मुगलिया दौर में टकसाल थी। इसके सड़क पार के हिस्से में म्यूजियम है तो दूसरी ओर टकसाल है। इस टकसाल का 2014 में कुछ हिस्सा संवारा गया था। तब कोठरियों की दीवारों और छत पर चूने का प्लास्टर किया गया था। अब फर्श के लाल पत्थरों को बदला जाएगा। ये पत्थर पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। इनमें ताज के चमेली फर्श की तरह गड्ढे हो गए हैं।