पांच दिवसीय दीपों का त्योहार दीपोत्सव में इस बार दो नवंबर को धनतेरस से शुरू हो रहा है, जो भैया दूज छह नवंबर तक मनाया जाएगा। इसका प्रमुख त्योहार दिवाली चार नवंबर और गोवर्धन पूजा पांच नवंबर की है। ज्योतिष गणना के अनुसार दिवाली पर ग्रह, नक्षत्र व योगों का विशिष्ट संयोग 30 साल बाद बन रहा है। 4 नवंबर को दिवाली बृहस्पतिवार के दिन चित्रा नक्षत्र में आरंभ होगी और स्वाति नक्षत्र की साक्षी में प्रीति व आयुष्मान योग के संयुक्त क्रम में मनाई जाएगी। साथ ही ग्रह गोचर की गणना बताती है दिवाली पर ग्रह, नक्षत्र व योगों का विशेष अनुक्रम बन रहा है। इसमें सूर्य, मंगल व चंद्र की युति विशेष लाभ देने वाली रहेगी। यही नहीं केंद्र में शुभ ग्रहों का योग भी सहयोगात्मक रहेगा। दीपों के त्योहार की शुरूआत धनतेरस से होती है, जो दिवाली से दो दिन पहले कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है. इसे धन त्रयोदशी या धनवंतरी जयंती भी कहते हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार धनतेरस पर इस बार खरीदारी और पूजा-अर्चना के लिए कई शुभ और विशेष फल देने वाले मुहूर्त बन रहे हैं। दिवाली पर शुभ ग्रहों का योग भी सहयोगात्मक रहेगा।