आगरा में थाना शाहगंज क्षेत्र के जिस केमिकल गोदाम में आग लगी वह एक रिहायशी बस्ती में अवैध रूप से संचालित हो रहा था। मकान मालिक ने अपने मकान के बाहर का कमरा किराए पर दिया। जहां जूता करखाना संचालक ने ज्वलनशील केमिकल को इकट्ठा कर लिया। ऐसे में जब केमिकल फैला तो उसकी चपेट में बस्ती के पूरे घर आ गए। नालियों में केमिकल बहने से आग बढ़ती ही गई।
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घनी बस्ती
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि आगरा में शाहगंज क्षेत्र के रामनगर की पुलिया इलाके में घनी बस्ती है। वहां की गलियां केवल तीन फीट चौड़ी हैं। यहीं पर मोहन सिंह के मकान में जूता कारखाना संचालक महेश ने जूता बनाने में प्रयोग होने वाली फोम, चमड़े के पीस और केमिकल रखने के लिए कमरा किराए पर लिया। मकान के बाहर बने करीब दस फीट चौड़े और दस फीट लंबे कमरे में यह गोदाम अवैध रूप से संचालित था।
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अाग
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में आसपास रहने वाले लोगों ने भी नहीं सोचा कि इस मकान में भरा केमिकल इतना भयानक होगा और पूरी बस्ती खाक होने की नौबत आ जाएगी। लेकिन बुधवार को सुबह करीब 10:45 पर जब आग लगी तो लोगों को केमिकल का असर पता चला। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहले कमरे में केमिकल फैला, इससे वहां रखी फोम और लैदर में आग लग गई।
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अाग
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद केमिकल मकान की नालियों से बहकर गली की नालियों में आ गया। यहां से मैनरोड के बाहर बड़े नाले में पहुंच गया। ऐसे में उस नाले में भी आग की लपटें उठने लगी। बताया जा रहा है कि जब आग लगी तो गोदाम मालिक का बेटा राजेश व कर्मचारी कालू व रोहन अंदर ही थे। आग बढ़ती देख राजेश और कालू तो भाग लिए।
रोहन गोदाम के अंदर ही फंस गया और जिंदा जलने से उसकी मौत हो गई। गली संकरी होने के कारण दमकल की गाडियों को भी आग बुझाने में मशक्कत करनी पड़ी। लोगों ने करीब दो घंटे बाद रोहन के शव को मकान से बाहर निकाल पाया।