कोरोना संकमण के कारण लगे लॉकडाउन के खुलने के बाद अक्तूबर में सिनेमाघर खुले, लेकिन 50 फीसदी दर्शकों की शर्त पर। संक्रमण के डर और बड़े बजट की नई फिल्में न आने से दर्शक सिनेमाघर की तरफ नहीं लौटे। इसके चलते बीते नौ महीने में आगरा के सिनेमा उद्योग को 18 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। सिनेमाघर मालिकों को इस साल तो घाटे से उबरने की उम्मीद नहीं है।
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मेहर सिनेमा के अंदर खाली सीटें
- फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी में 14 सिंगल, एक टू स्ट्रिन और चार मल्टीप्लेक्स सिनेमाघर हैं। इनमें तमाम तो पहले से बंद हैं, बाकी कोरोना की वजह से बंद हो गए। कुछ सिनेमाघरों में पुरानी फिल्में लगी हैं, दर्शक उन्हें देखने नहीं पहुंच रहे। मार्च में कोरोना ने दस्तक दी, तीसरे हफ्ते में लॉकडाउन लग गया। मई तक सब कुछ बंद था। जून में कारोबार शुरू हुए, मगर शॉपिंग मॉल और सिनेमाघर फिर भी बंद रखे गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
अक्तूबर में सिनेमाघरों को खोलने की अनुमति आधे दर्शकों के साथ मिली। उसे देखते हुए सिनेमाघर मालिकों ने लाइसेंस नवीनीकृत कराए। मगर, कोरोना केस बढ़ने के कारण 20 फीसदी दर्शक भी सिनेमाघरों में नहीं पहुंचे। अब भी ज्यादातर सिनेमाघर बंद ही हैं। सिनेमाघर मालिकों का कहना है कि कोरोना के डर से मुंबई में बड़े बजट की फिल्में नहीं बन रहीं। मल्टीप्लेक्स हाल में एक साथ चार फिल्में लगती हैं, तब कहीं जाकर दर्शक उन्हें देखने पहुंचते हैं। सिंगल सिनेमाघर पहले से ही बदहाल हैं। अगर सिनेमा कारोबार घाटे से नहीं उबरा तो भविष्य में इसे बंद करके कुछ और सोचना पड़ेगा।
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सिनेमा घर-मल्टीप्लेक्स बंद
- फोटो : Amar Ujala
बड़े बजट की नई फिल्म आए तो दर्शक आएं
कोरोना की वजह से इस समय छोटे बजट की फिल्में आ रही हैं। दर्शक उन्हें देखना पसंद नहीं करते। बड़े बजट की फिल्में आएं, तभी दर्शक आएंगे। 20 फीसदी दर्शक भी नहीं हैं। आमदनी की तो छोड़ो, हर महीने जेब से दो लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। - नामित अग्रवाल, मालिक श्री टाकीज
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सिनेमा हाल
- फोटो : amar ujala
बेकार गया साल 2020
कोरोना ने पूरा सिनेमा कारोबार चौपट कर दिया। जब तक बड़े बजट की नई फिल्म नहीं आएगी, तब तक दर्शक सिनेमाघरों की ओर नहीं निकलेंगे। साल 2020 तो बेकार चला गया। नए साल में ही कुछ अच्छी फिल्में आने की उम्मीद है। तभी इंडस्ट्री का कुछ हो पाएगा। मेहर प्रसाद, मालिक मेहर टाकीज
फीस चुकाना भी मुश्किल हुआ
सिनेमाघरों में दर्शक नहीं हैं। नई फिल्में नहीं आ रहीं। पुरानी फिल्में दर्शक देखना पसंद नहीं करते। कुछ सिनेमाहाल मालिकों ने रिन्यूवल लाइसेंस लिया था। मगर, वह फीस नहीं दे पाए। तमाम सिनेमाघर मालिकों को फीस चुकाना मुश्किल पड़ रहा है। - आरडी रावत, जिला मनोरंजन कर अधिकारी