सूर्य की उपासना और छठी मैया की पूजा के महापर्व छठ की शुरुआत नहाय-खाय के साथ हो गई। आगरा में संतान प्राप्ति के साथ ही उनकी मंगलकामना के लिए लोगों ने प्रार्थना की। सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान ‘छठ मैया के दिहल ललनवा अंगनवा डोले’ आदि गीतों का दौर पूरे दिन चला।
व्रतियों ने सूर्य देव और छठ मैया को मनाने के लिए तन और मन स्वच्छ रखने के उपाय किए। घरों में पूजा पाठ का दौर चला। घरों में लौकी की सब्जी, चावल और चने की दाल विशेष रूप से बनाई गई। इस दौरान ‘कोपी कोपी बोलेली ये छठि माई, सुना ये सेवक लोग, मोरे घाटे दुबिया जमि गइल मकई बसेरा डलली..’गीत गाए गए। खासतौर से शहर में रह रहे पूर्वांचल के परिवारों में छठ की खुशी देखी गई।
ये प्रसाद होता है तैयार
सब्जियां, ईख, नारियल, ठेकुआ (मीठा पकवान), नए चावल के लड्डू, मौसमी फल सूर्य और देवी को अर्पित किए जाते हैं। अगले दिन सूर्य की उपासना के बाद इसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।