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ब्रज में जीवंत हुई द्वापर युग की लीला: 5100 दीपों से झिलमिलाया चंद्र सरोवर, 'महारास' देख मचल उठीं लहरें

Wed, 20 Oct 2021 12:12 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
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चंद्र सरोवर पर हुई महारास लीला - फोटो : अमर उजाला
मथुरा के गोवर्धन में शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर महारास की लीला ने एक बार फिर द्वापर युग को जीवंत कर दिया। मंगलवार शाम को दीपों की रोशनी से चंद्र सरोवर झिलमिला उठा। शरद पूर्णिमा पर प्रभु की महारास लीला देख ब्रज का कण कण खुद को धन्य मानने लगा। ब्रज के मंदिरों में ठाकुरजी ने श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। पदम् श्री सम्मानित शेखर सेन ने नृत्य नाटिका की प्रस्तुति देकर जमकर तालियां बटोरी। सूर की साधना स्थली परसौली के चंद्र सरोवर पर आयोजित महारास मंचन देखने के लिए सांसद हेमा मालिनी, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्र और भाजपा विधायक कारिंदा सिंह भी पहुंचे। महारास की लीला देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। 
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चंद्र सरोवर पर दीप जलाते संत - फोटो : अमर उजाला
राधाकृष्ण का ब्रज गोपिकाओं के संग महारास का यह उत्सव शरद पूर्णिमा पर निराला ही होता है। चंद्र सरोवर में 51 सौ दीप जलाए तो महारास स्थल रोशन हो गया। गिरधारी मुखिया, ओम प्रकाश कौशिक ने चंद्र सरोवर की लहरों को दीपों से सजाया था। अद्भुत सौंदर्य पर चंद्र सरोवर भी इठला रहा था। स्वर और सुर के संगम में बही भक्ति की रसधारा और बांसुरी की धुन दर्शकों को आनंद के चरम पर पहुंचा रही थी।
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चंद्र सरोवर पर जलाए गए 5100 दीप - फोटो : अमर उजाला
मलूक पीठाधीश्वर आचार्य राजेंद्र दास और संत सियाराम बाबा के सानिध्य में आयोजित हुई महारास लीला को दर्शक अपलक निहारते रहे। मंदिरों में भगवान रास बिहारी को खीर का भोग समर्पित किया गया। इस अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। 

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चंद्र सरोवर पर हुई महारास लीला - फोटो : अमर उजाला
भागवत वक्ता पूरन कौशिक बताते हैं कि महारास की आभा ने वक्त को सम्मोहित कर ठहरने पर मजबूर कर दिया। आसमान से छह महीने तक चंद्र देव (चंद्रमा) अपने स्थान से नहीं हटे। प्रभु की लीला के दर्शन को दिन निकलने तक चांद मचलता रहा। चंद्रमा के द्रवित रस से ही परासौली में चंद्र सरोवर का निर्माण हुआ। 
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भाजपा सांसद हेमा मालिनी, संत व अन्य लोग - फोटो : अमर उजाला
वराह पुराण में परासौली का उल्लेख तो यही कहता है। गर्ग संहिता में चंद्र सरोवर का महात्म्य बताया गया है। महाप्रभु बल्लभाचार्यजी के मतानुसार दिव्य स्थलों से सजी ब्रज वसुंधरा का हिस्सा पारसौली सारस्वत कल्प की वही पवित्र भूमि है, जहा प्रभु ने गोपियों के साथ छह महीने की रात्रि का निर्माण करके महारास किया।
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