फतेहपुर सीकरी के पास अरावली की पहाड़ियों में मौजूद सात हजार साल से ज्यादा पुरानी रॉक पेंटिंग को संरक्षित करने की सिफारिश की गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दिल्ली मुख्यालय को यह सिफारिश भेजी है।
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फतेहपुर सीकरी
- फोटो : अमर उजाला
फतेहपुर सीकरी के रसूलपुर, मदनपुर, पतसाल और जाजाली में रॉक पेंटिंग्स को लंबे समय से संरक्षित किए जाने की मांग की जा रही थी। सीकरी की पहाड़ियों में खनन के कारण रॉक पेंटिंग का बड़ा हिस्सा नष्ट भी हो चुका है, कुछ पहाड़ियों पर ही यह बाकी हैं।
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फतेहपुर सीकरी
मुगलों की राजधानी रहे फतेहपुर सीकरी के पास रसूलपुर में 12, मदनपुरा में तीन, जाजाली में आठ और पतसाल में चार रॉक शेल्टर्स की खोज रॉक आर्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के सचिव पुरातत्वविद डॉ. गिरिराज कुमार ने 80 के दशक में की थी। अवैध खनन से रॉक शेल्टर्स को काफी क्षति पहुंची है, जिससे अनमोल धरोहर नष्ट होती रही।
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फतेहपुर सीकरी में राजा टोडरमल की बाराद्वारी
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट की ओर से खनन पर रोक के बाद कुछ रॉक शेल्टर्स और पेंटिंग बची हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इन रॉक शेल्टर्स को संरक्षित करने के लिए रिपोर्ट दिल्ली मुख्यालय को भेजी है। अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि रॉक पेंटिंग और शेल्टर्स को संरक्षित करने के लिए मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई है।
हाथी-नीलगाय के बने हैं चित्र
पतसाल व मदनपुरा स्थित रॉक शेल्टर्स में काफी पेंटिंग बनी हैं। इनमें बने चित्र सात हजार साल पुराने से लेकर गुप्त काल तक के हैं। पतसाल के रॉक शेल्टर्स के पास खेतों में ऐसे साक्ष्य मिले थे, जिनसे साबित होता है कि यहां आदिमानव रहते होंगे। पतसाल में पेड़-पौधे, पशु समूहों, नृत्य व हथियारों से संबंधित चित्र रॉक शेल्टर्स में बने मिले। मदनपुरा में दंतीला हाथी, नीलगाय, दो सांड़ के चित्र नजर आए हैं।