भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने फतेहपुर सीकरी के रसूलपुर, पतसाल और जाजौली गांवों में मौजूद करीब 7 हजार साल पुरानी रॉक पेंटिंग्स को संरक्षित करने के लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी की है। प्रक्रिया पूरी होने पर ये स्थल आगरा जिले के 71वें संरक्षित स्मारक बन सकते हैं।
फतेहपुर सीकरी में अरावली की पहाड़ियों में मौजूद प्रागैतिहासिक काल की रॉक पेंटिंग्स को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सहेजने का काम करेगा। रसूलपुर, पतसाल और जाजौली गांवों में स्थित रॉक पेंटिंग्स को संरक्षित सूची में शामिल किया है। राष्ट्रीय महत्व के स्मारक की घोषणा के लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिले में यह 71वां और सर्किल क्षेत्र में 155वां स्मारक होगा।
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रॉक पेंटिंग
- फोटो : अमर उजाला
आठ साल के लंबे इंतजार के बाद फतेहपुर सीकरी की रॉक पेंटिंग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। एएसआई महानिदेशक यदुवीर सिंह ने सीकरी के तीन गांव रसूलपुर, पतसाल और जाजौली में प्रागैतिहासिक काल यानी लगभग 7 हजार साल पुरानी रॉक पेंटिंग को संरक्षित करने की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की है। पहली बार अधिसूचना जारी करते हुए महानिदेशक ने राजस्व भूखंड और इसकी सीमाओं का ब्योरा दिया है।
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रॉक पेंटिंग
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चील और नाई की गुफा है इनका नाम
सीकरी के रसूलपुर में चील की गुफा के नाम से बने रॉक शेल्टर की पेंटिंग के लिए गाटा संख्या 276 के एक हेक्टेयर को संरक्षित किया गया है, जबकि पतसाल गांव में नाई की गुफा नाम से पेंटिंग के लिए गाटा संख्या 718/2 का 0.396 हेक्टेयर हिस्सा संरक्षित हिस्से में शामिल किया गया है। जाजौली गांव में रॉक शेल्टर की पेंटिंग के लिए गाटा संख्या 138 में 0.63 हेक्टेयर जमीन तय की गई है। तीनों गांव की अधिसूचना जारी करते हुए एएसआई ने चहारदीवारी का नक्शा लगाया है, जिसमें गांव के रास्ते, तालाब और गाटा संख्या के आसपास का पूरा ब्योरा दिया गया है। पूर्व में विवादों की स्थिति होने के कारण एएसआई ने स्मारक की स्थिति को स्पष्ट किया है।
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रॉक पेंटिंग
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60 दिन में दर्ज कराएं आपत्तियां
महानिदेशक यदुवीर सिंह रावत की ओर से रॉक शेल्टर्स की पेंटिंग के लिए जारी की गई प्रारंभिक अधिसूचना में 60 दिन के अंदर आपत्तियां मांगी गई हैं। रुचि रखने वाले व्यक्ति 15 दिसंबर तक महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, 24 तिलक मार्ग, नई दिल्ली को या ई-मेल dg.asi@gov.in पर आपत्तियां भेज सकते हैं। इन पर केंद्र सरकार विचार करेगी। एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार ने बताया कि चार माह पहले संशोधित करके प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। अब प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई है।
हाथीखाना, हवेली आगा खां के बाद संरक्षण की अधिसूचना
आगरा में संरक्षित स्मारकों की सूची में यह 71वां और आगरा सर्किल में 155वां स्मारक हो जाएगा। आठ साल पहले अगस्त 2018 में मुगल काल की दो धरोहरें हाथी खाना और हवेली आगा खां संरक्षित हुई थीं। हाथीखाना ताजमहल के पूर्वी गेट पर बना है, जबकि हवेली आगा खां यमुना किनारे ताजमहल के पूर्वी गेट पर मौजूद है। अमर उजाला ने ही रॉक शेल्टर्स को संरक्षित करने की मुहिम शुरू कराई थी, जिस पर अगस्त में हुई तकनीकी समिति की बैठक में इस पर सहमति दी गई थी।