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सरकार हमारा दर्द समझिए: हर तरफ खोदा पड़ा आगरा.... लोग जाम, धूल, गंदगी झेलने को मजबूर, पढ़िए ये खास रिपोर्ट

Thu, 01 Jul 2021 11:21 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आगरा: यमुना किनारा रोड पर खुदी पड़ी सड़क और खुली पाइप लाइन - फोटो : अमर उजाला
कागजों में स्मार्ट सिटी के रूप में आगरा को नंबर 1 का तमगा मिल गया, लेकिन प्रभारी उपमुख्यमंत्री जी, शहर हर तरफ खोदा हुआ पड़ा है। दिनों के काम महीनों और महीनों के काम सालों से अटके हुए हैं। शहर की लाइफ लाइन यानी सड़कें खुदी होने से हर दिन ट्रैफिक जाम, धूल के गुबार और गंदगी लोगों को परेशान कर रही है। शहर के मेडिकल कॉलेज से लेकर बाजारों तक सीवर उफन कर संक्रामक रोगों की वजह बन रहा है। गंदगी, सीवर, बेतरतीब खोदाई और जाम शहर के लाखों लोगों के लिए नासूर बन गया है। 
100 किमी लंबी सड़कें खोद दीं 
शहर में सीवर और पानी के लिए 100 किमी से लंबी सड़कें जलनिगम की निर्माण इकाई, विश्व बैंक इकाई और आगरा स्मार्ट सिटी ने खोद दी हैं। एक साल से हालात खराब हैं। चार लाख लोग खुदी सड़कों के कारण धूल के गुबार, जाम में फंसने को मजबूर हैं। आगरा स्मार्ट सिटी ताजगंज के लिए पानी की पाइप लाइन बिछाने का काम कर रही है। 7 महीने से रोड ट्रैफिक के लिए बंद है। 1200 एमएम व्यास की लाइन बिछाने के लिए सड़क खोदी गई, लेकिन गड्ढे 25 जून की मियाद निकालने पर भी नहीं भरे।


 
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आगरा सड़क पर उड़ती धूल - फोटो : अमर उजाला
अलबतिया रोड
जलनिगम ने पानी की लाइन बिछाने के लिए खोदाई की, लेकिन सड़क का निर्माण नहीं किया। मिट्टी के ढेर सड़क पर पड़े हैं। 30 हजार लोग हर दिन धूल और गड्ढों के बीच से निकल रहे हैं। लगातार हादसे हो रहे हैं।
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अवधपुरी-मारुति इस्टेट - फोटो : अमर उजाला
अवधपुरी-मारुति इस्टेट
पानी की लाइन के लिए खोदी गई सड़क से दो किमी लंबी सड़क खराब हो गई। एक साल से निर्माण भी नहीं किया। बोदला-शाहगंज रोड की खोदाई के कारण यह वैकल्पिक मार्ग बन सकता था, लेकिन सड़क खुदी पड़ी है।
 

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एसएन मेडिकल कॉलेज के नाले में जमा सिल्ट - फोटो : अमर उजाला
नालों में उग आए पौधे, 2 साल से सफाई नहीं
मानसून से पहले नालों की सफाई के लिए 25 जून की तारीख नगर निगम ने तय की थी, लेकिन नालों की सफाई हुई ही नहीं। आलम ये है कि नालों में सिल्ट जमा होने से उसमें पौधे उग आए हैं। कचरे, चमड़े की कतरनों से नाले भरे हैं, पर कागजों में 92 फीसदी नाले साफ हैं।

एस एन मेडिकल कॉलेज नाला
दो साल पहले टीबी अस्पताल के दौरे में मेयर नवीन जैन ने नाले की सफाई के आदेश दिए, लेकिन अब इस नाले की सफाई तो दूर, नाले के अंदर पौधे उग आए हैं। नाला सफाई की मियाद भी बीत चुकी।
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काजीपाड़ा नाला - फोटो : अमर उजाला
रामनगर-अलबतिया रोड नाला
चार साल पहले नाले की सफाई हुई, उसके बाद से नाला साफ नहीं हुआ। दो वर्ग किमी क्षेत्र में नाले से जलभराव हाल की बारिश में हो चुका है। सेनेटरी इंस्पेक्टर नाला सफाई की फर्जी रिपोर्ट दाखिल कर चुके।

काजीपाड़ा नाला
ब्रिटिश काल की डाट से बनी पुलिया के नीचे कचरा फंसने से काजीपाड़ा में जलभराव की समस्या है, लेकिन दो साल से न नई पुलिया बनी, न नाले के ओवरफ्लो होने का समाधान निकाला जा सका
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एसएन मेडिकल में भरा पानी - फोटो : अमर उजाला
48 करोड़ रुपये में सीवर सफाई का ये हाल
18 महीने पहले नगर निगम ने चेन्नई की कंपनी वीए टेक वबाग से वन सिटी, वन ऑपरेटर की नीति पर आगरा की सीवर नेटवर्क, एसटीपी संचालन का जिम्मा सौंपा, लेकिन शहर के बाजारों, अस्पतालों, कालोनियों में सीवर समस्या बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर नीरी और वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी मेहता की टीम को आगरा भेज चुके हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की संजीदगी पर भी हालात में सुधार नहीं हुए।

एसएन मेडिकल कॉलेज
उत्तर भारत के बड़े मेडिकल कालेजों में से एक सरोजनी नायडू मेडिकल कालेज परिसर में सीवर भरा होने से मरीजों और उनके तीमारदारों के सामने परेशानी है। एक साल से समस्या है, लेकिन स्थायी निदान नहीं हुआ
 
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सड़क किनारे लगा कूड़े का ढेर - फोटो : अमर उजाला
बेलनगंज
शहर के प्रमुख बाजार बेलनगंज में दुकानों के सामने सीवर भरा होने से अनलॉक होने के बाद व्यापारी परेशान है। बाजार में सीवर के कारण ग्राहक आ नहीं रहे। बेलनगंज की तरह पुराने शहर में सीवर उफनने से लोग परेशान हैं।

पंचकुइयां
बीते साल लॉक डाउन में पचकुईयां पर सीवर सफाई का काम शुरू हुआ, लेकिन सीवर उफनना बंद नहीं हुआ। अब एक महीने से चौराहे पर नई लाइन के लिए खोदाई की गई है जो अब तक पूरी नहीं हुई।
 

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कूड़े का ढेर - फोटो : अमर उजाला
कूड़ा कलेक्शन फेल, सड़कों पर कचरा
6 जनवरी 2020 को नगर निगम ने डोर-टू-डोर कूड़ा लेने वाली कंपनियों का घोटाला पकड़ा और उन्हें ब्लैक लिस्ट किया। 18 महीने से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कागजों में चल रहा। सड़क पर कचरे के ढेर हैं। स्मार्ट सिटी की सड़कें दुर्गंध, कचरे से भरी पड़ी हैं। नगर निगम डेढ़ साल में एक कंपनी नहीं तलाश कर सका।

फ्रीगंज-बेलनगंज
बिजली सबस्टेशन के सामने कचरे के ढेर दिन भर लगे हैं। यहां आधी सड़क पर कचरा फैला है। शहर को इंदौर की तर्ज पर डस्टबिन फ्री बनाने का दावा था, लेकिन नई सड़कों पर कचरे के ढेर लगने लगे

कोठी मीना बाजार मैदान
अस्पताल और पेट्रोल पंप के सामने कचरे की नई डंपिंग साइट बना दी गई। मैदान में शाहगंज क्षेत्र का कचरा खुले मैदान के नीचे मिट्टी में डाला जा रहा। जयपुर रोड होने के कारण हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं।
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राजा की मंडी - फोटो : amar ujala
राजामंडी स्टेशन के गेट पर बनाया डलाबघर
राजा मंडी रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार पर न्यू राजा मंडी में नगर निगम ने डलाबघर बना दिया है। इसी के बगल में चामुंडा देवी मंदिर का गेट है। डलाबघर की पॉलिथिन व कूड़ा उड़कर स्टेशन के प्लेटफार्म तक पहुंच जाता है। स्टेशन अधीक्षक राजेंद्र सिंह ने बताया कि नगरायुक्त को कई बार पत्र लिखा है मगर डलाबघर नहीं हटाया जा रहा है।  

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