फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की पुण्यतिथि पर विशेष: बटेश्वर में वीरान पड़ा है अटलजी की यादों का आंगन, तस्वीरें...

Sun, 16 Aug 2020 04:56 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 6
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
आगरा जिले के बटेश्वर की गलियों में खेलकूद कर बडे़ हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज दूसरी पुण्यतिथि है, लेकिन बटेश्वर में अटलजी की यादों का आंगन वीरान पड़ा है। विरासत की उपेक्षा यहां की हर गली-घर को आहत कर रही है। उनसे जुड़ी हुई बटेश्वर का गौरव बढ़ाने वाली दास्तानें आंखों में यशोगान के आंसू भर देती है।
विज्ञापन

2 of 6
बटेश्वर में यमुना घाट पर अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर की गलियों में खेलकूद कर बडे़ हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जिन घाटों पर यमुना में नहाए, जिस यज्ञशाला में आहुतियां दी, जिस पाठशाला में पढ़े, जिस जंगलात कोठी को फूंककर क्रांति का आगाज किया, वो सब आज उपेक्षित पडे़ हैं। 
विज्ञापन

3 of 6
अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
दो साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बटेश्वर के घाट पर अटलजी की अस्थि विसर्जन के लिए आए तो उनसे जुडे़ हुए स्मृति स्थलों के विकास का खाका तैयार हुआ। तब से महज यमुना के घाटों के विकास का काम शुरू हो सका है। 

4 of 6
अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक घर के अवशेष - फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भतीजे राकेश वाजपेयी ने बताया कि उनके घर के वीरान पडे़ आंगन के विकसित करने की योजना पर अमल नहीं हो सका है। यज्ञ स्थल उपेक्षित पड़ी है। 
विज्ञापन

5 of 6
अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर का रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
पारिवारिक भाई रमेश वाजपेयी ने बताया कि अटलजी के नाम पर बटेश्वर में स्टेशन नहीं बन सका। पर्यटन कॉम्पलेक्स उजड़ गया। जंगलात कोठी भी जर्जर है। अटलजी की पाठशाला में शिक्षक रहे पुत्तूलाल कहते हैं कि उनकी पाठशाला तक का कायाकल्प नहीं हो सका है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
इसी स्कूल में पढ़े थे अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
अटलजी का सानिध्य पाने वाले रामसिंह आजाद ने बताया कि बटेश्वर का हर एक टीला और हर एक भरका उनकी गौरव गाथा से भरा पड़ा है। अफसोस गौरव गाथा के स्मृति चिन्ह उपेक्षित पडे़ हैं। देश का मान बढ़ाने वाले अटलजी की विरासत को सहेजा जाना चाहिए। जिससे देश दुनिया में बटेश्वर की पहचान अटलजी से हो। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें