आगरा के मोती कटरा में 1000 हजार घंटों से लोग दहशत में हैं। वजह है उनके खुद के घर और इमारतें, जिनके गिरने का डर सता रहा है। छतों को जैक लगाकर साधा गया है। हल्की सी आहट भी लोगों को डरा रही है।
घरों के नीचे से मोती कटरा में टनल की खुदाई ने 150 परिवारों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। एक हजार घंटों से भी ज्यादा समय से यहां के लोग दहशत में जी रहे हैं। घर, इमारतों की छतों को टिकाए रखने के लिए जैक का सहारा लिया जा रहा है। हल्की सी आहट होने पर लगता है कि घर गिर जाएगा। 2000 वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र में बने मकानों में रहने वालों का जीवन मेट्रो की खुदाई के कारण पूरी तरह से बदल गया है।
मोती कटरा में हर घर, गली में जैक और पाइप लगे हैं। घराें के ड्राइंग रूम से लेकर किचन, आंगन, बेडरूम तक जैक और पाइपों का सहारा लेकर रोके गए हैं। गलियों में छज्जों को गिरने से रोकने और मकानों के तिरछे हो जाने पर जैक लगाया गया है। गली से निकलना तक इससे मुहाल हो गया। एक भी पाइप किसी जानवर या इंसान के निकलने से हटा और पूरी इमारत भरभराकर नीचे गिरने की आशंका से ही लोग सहमे हुए हैं। मेट्रो की ओर से पीड़ित परिवारों को प्रति व्यक्ति 500 रुपये प्रतिदिन का मुआवजा दिया जा रहा है।
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जैक पर टिकी छत
- फोटो : अमर उजाला
यूपी मेट्रो कॉरपोरेशन ने बुधवार से टनल बोरिंग मशीन की स्पीड कम कर दी है। पूरा काम अब धीमे हो रहा है। मकानों की मरम्मत के काम में नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाने लगा है। दरारों में इंजेक्शन के जरिए सीमेंट कंक्रीट भरवाया जा रहा है।
सीवर-पानी की नई लाइनें बिछाई जाएंगी
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जैक पर टिकी छत
- फोटो : अमर उजाला
टनल बोरिंग के कारण आई दरारों में ग्राउटिंग किए जाने से सीवर और पानी की लाइनें मोती कटरा में जाम हो गई। क्षतिग्रस्त हुई सीवर लाइनों के कारण पूरे क्षेत्र का सीवर नेटवर्क जाम हो गया। इसे बदलने के लिए कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मेट्रो प्रबंधन को निर्देश दिए हैं। मेट्रो इस काम को नगर निगम की निगरानी में कराएगा।
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जैक पर टिकी छत
- फोटो : अमर उजाला
एक्सरे में सामने आई जमीन की रिपोर्ट
मोती कटरा में मिट्टी की जांच के लिए आईआईटी की टीम ने टोपोग्राफी कराई थी। इसमें पाया गया है कि मोती कटरा टीलों पर बसा हुआ है, जिसमें मकान बनाने के लिए मिट्टी का भराव कराया गया होगा। नीचे टनल बनने पर मिट्टी का सेटलमेंट होने लगा। वहीं कई जगह कुएं पाटकर भी मकान बनाए गए। इससे हुए सेटलमेंट में मकानों में दरारें आ रही हैं। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि दिल्ली के चांदनी चौक, लखनऊ के हजरतगंज और आगरा में भी पुराने शहर से मेट्रो की टनल खोदी गई, पर दरारें कही नहीं आई। आईआईटी की रिपोर्ट जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट आ जाएगी, जिसमें मकानों में आई दरार की प्रमुख वजहों का खुलासा हो जाएगा।
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घर में आई दरार दिखाती महिला
- फोटो : अमर उजाला
पढ़ाई, कारोबार सब प्रभावित
मोती कटरा निवासी रविंद्र जैन ने बताया कि पूरे मोती कटरा में हर घर, मंदिर में दरारें आ चुकी हैं। हल्की सी आहट पर लगता है कि घर गिर जाएगा। मेट्रो ने जीवन मुश्किल में डाल दिया है। बच्चों की पढ़ाई, लोगों का कारोबार, सब मेट्रो के कारण प्रभावित है। मोती कटरा जैन मंदिर की दूसरी मंजिल पर दरारें हैं। -,
विशेषज्ञों की निगरानी में घर करा रहे सुरक्षित
यूपीएमआरसी के पीआरओ पंचानन मिश्रा ने बताया कि मोती कटरा में प्रभावित मकानों में रहने वालों को मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है। अब तक 150 लोगाें को मुआवजा दिया जा चुका है। उनके घरों को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी विशेषज्ञों की निगरानी में पूरी की जा रही है।