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Sim Port: सिम पोर्ट कराते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान, नहीं तो हो सकता है ये बड़ा नुकसान

Sun, 26 May 2024 06:01 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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सिम पोर्ट कराते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान - फोटो : Freepik
Sim Port: लोगों को अपने सिम कार्ड को दूसरी टेलीकॉम कंपनी में पोर्ट कराने की सुविधा मिलती हैं। ऐसे में कई लोग मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी (MNP) का फायदा उठाते हैं। वह एक टेलीकॉम कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी का सिम लेते हैं। मोबाइल सिम पोर्ट ऐसी सुविधा है, जिसमें ग्राहक को अपना नंबर बदले बिना ही ऑपरेटर बदलने की सुविधा मिलती है। इसका मतलब यह है कि ग्राहक अपना नंबर बदले ही दूसरी कंपनी की सिम में इसे पोर्ट करा सकते हैं। 

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने 23 सितंबर 2009 को मोबाइल सिम पोर्ट करने की सुविधा की शुरुआत की थी। हालांकि, ग्राहक को सिम पोर्ट करवाने से पहले कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे आपका नंबर खोने से बच जाए। अगर ग्राहक इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं, तो वो सालों पुराने नंबर से हाथ धो बैठेंगे। आइए जानते हैं इन जरूरी बातों के बारे में...
 
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सिम पोर्ट कराते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान - फोटो : Freepik
वर्तमान समय में नेटवर्क की समस्या आम हो चुकी है। कई लोग नेटवर्क की समस्या की वजह से अपना ऑपरेटर बदल लेते हैं। टेलीकॉम की भाषा में इसे सिम पोर्ट कहा जाता है। कई बार लोग नेटवर्क की समस्या या किसी और अन्य वजह से अपना सिम ऑपरेटर बदलना चाहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिम कार्ड पोर्ट कराना कितना आसान है? आज हम आपको इस जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं...
 
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सिम पोर्ट कराते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान - फोटो : Freepik
ऐसे नंबर कराएं पोर्ट 

सबसे पहले नंबर को पोर्ट कराने के लिए PORT लिखकर स्पेस दें और फिर पोर्ट कराने वाला नंबर टाइप करें। 

जैसे-  PORT 9000000000> मैसेज लिखकर आप 1900 पर भेज दीजिए।

मैसेज भेजने के बाद आपको अपने वर्तमान मोबाइल ऑपरेटर से 8 अंकों का UPC (यूनिक पोर्टिंग नंबर) मिलेगा।

यह यूपीसी 4 दिनों के अंदर समाप्त हो जाता है, लेकिन जम्मू और कश्मीर, उत्तर पूर्व और असम में यह 30 दिनों के लिए मान्य होता है।

आवेदन चार दिनों के अंदर नए ऑपरेटर को देना अनिवार्य रहता है। 

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सिम पोर्ट कराते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान - फोटो : Freepik
आप अपने नए सर्विस प्रोवाइडर के स्टोर पर जाएं। यहां पर आपको आधार कार्ड या फिर किसी आइडी प्रूंफ की जरूरत पड़ती है। नए ऑपरेटर की तरफ से पुराने ऑपरेटर को यह देखने के लिए एक आवेदन भेजा जाएगा कि आपके नंबर के साथ कोई बकाया राशि या समस्या तो नहीं है। वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुराना ऑपरेटर नए ऑपरेटर को एमएनपी आवेदन की अस्वीकृति/अनुमोदन स्टेटस के बारे में जानकारी दे देगा। इसके बाद अन्य प्रक्रिया चलती रहेगी और इसकी जानकारी आपको ऑपरेटर से मिलती रहेगी। पहले इस प्रक्रिया में करीब 7 दिन लगते थे, लेकिन अब सिर्फ दो से तीन दिनों में यह पूरा हो जाता है। इसके लिए लोगों को कहीं जाने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। ऑपरेटर ने सिम पोर्ट की सुविधा को घर बैठे ही देना शुरू कर दिया है। 

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सिम पोर्ट कराते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान - फोटो : Freepik
...तो आपका आवेदन अस्वीकार हो सकता है

अगर ग्राहक ने दिए समय में मोबाइल बिल का भुगतान नहीं कर पाया है। 

इसके साथ ही पुराने ऑपरेटर का कम से कम 90 दिनों तक इस्तेमाल न किया गया हो। 

मोबाइल नंबर पर किसी तरह का कोई आपराधिक मामला दर्ज हो। जिस ऑपरेटर में सिम बदलना चाहते हैं वो आपके शहर की सेवा में ही ना हो

यूपीसी मेल नहीं खाती हो

मोबाइल नंबर किसी फर्म या संस्था के नाम पर रजिस्टर्ड हो। 
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