New Parliament Building: नए संसद भवन में मंगलवार से कामकाज शुरू हो गया। नई संसद में कुल 1280 सासदों के बैठने की व्यस्था है। लोकतंत्र का मंदिर यानी संसद भवन काफी खूबसूरत दिखता है। संसद भवन के द्वार पर सत्यमेव जयते लिखा गया है। संसद का वर्तमान भवन 1927 में बन था, जो अब करीब 100 साल पुराना होने वाला है। इसके दोनों सदनों में सांसदों के बैठने की सुविधाजनक व्यवस्था का अभाव होने की वजह से नई संसद की जरूरत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुराने संसद भवन का नाम 'संविधान सदन' रखा है। अब पुरानी संसद भवन को 'संविधान सदन' के नाम से जाना जाएगा। आइए जानते हैं इस नए संसद भवन की खास बातें...
1200 करोड़ में बनकर तैयार हुई नई संसद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर, 2020 में नए संसद भवन की आधारशिला रखी थी। तीन साल से कम समय में नई संसद बनकर तैयार हो गई। त्रिकोणीय आकार की चार मंजिला यह इमारत 64,500 वर्ग मीटर में फैली है। पुरानी संसद से नई संसद भवन लगभग 17,000 वर्ग मीटर बड़ा है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार इस भवन पर भूकंप का असर नहीं होगा। नई संसद भवन को बनाने में 1200 करोड़ की लागत आई है, जो पहले अनुमानित लागत 971 करोड़ रुपये तय थी।