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बच्चा पढ़ते-पढ़ते नींद में झूलने लगे तो क्या करें? पढ़ाई का समय ही नहीं, ये आदत भी हो सकती है वजह

Thu, 17 Sep 2026 04:36 PM IST
दीक्षा पाठक यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला

सार

Child Feels Sleepy: अगर बच्चा पढ़ते समय बार-बार ऊंघने लगे तो हर बार इसकी वजह पढ़ाई का समय नहीं होती। नींद पूरी न होना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, कमरे का माहौल और पढ़ाई का तरीका भी इसकी वजह बन सकता है। कुछ आसान बदलाव करके बच्चे को पढ़ाई के दौरान ज्यादा एक्टिव रखा जा सकता है।
 
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पढ़ते-पढ़ते बच्चे की आंखें बंद होने लगती हैं? - फोटो : AI

बच्चों का पढ़ाई करते-करते ऊंघना पैरेंट्स के लिए काफी आम परेशानी है। कई बार बच्चा किताब खोलकर बैठता है और कुछ ही देर में उसकी आंखें बंद होने लगती हैं। ऐसे में अक्सर लगता है कि बच्चा पढ़ाई से बचने के लिए बहाना बना रहा है। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कई छोटी-छोटी वजहें भी बच्चे को पढ़ते समय नींद आने की वजह बन सकती हैं। तो आज की खबर में हम आपको इसी के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।

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पढ़ते-पढ़ते बच्चे की आंखें बंद होने लगती हैं? - फोटो : Adobe Stock

सबसे पहले बच्चे की नींद पर दें ध्यान
अगर बच्चा रात में देर तक जागता है और सुबह जल्दी उठ जाता है तो दिन में पढ़ते समय उसे नींद आना स्वाभाविक है। बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से पर्याप्त नींद की जरूरत होती है। इसलिए सबसे पहले यह देखें कि बच्चा रोज लगभग एक ही समय पर सो और जाग रहा है या नहीं। सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल या टीवी देखने की आदत भी नींद की दिनचर्या बिगाड़ सकती है। 

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पढ़ते-पढ़ते बच्चे की आंखें बंद होने लगती हैं? - फोटो : Adobe Stock

घंटों एक ही जगह बैठकर पढ़ना भी बन सकता है वजह
लगातार लंबे समय तक किताब के सामने बैठे रहने से बच्चे का ध्यान भटक सकता है और उसे सुस्ती महसूस हो सकती है। खासकर अगर बच्चा बिना किसी छोटे ब्रेक के लगातार पढ़ रहा है तो कुछ देर बाद उसका मन और शरीर दोनों थक सकते हैं। इसलिए पढ़ाई के बीच उम्र और पढ़ाई के हिसाब से छोटे ब्रेक देना मददगार हो सकता है। ब्रेक में बच्चे को थोड़ा चलने-फिरने या पानी पीने दें या फिर बीच-बीच में उनसे बात करें ताकि वो रिफ्रेश हो जाए और फिर से मन लगाकर पढ़ाई कर सकें। 

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पढ़ते-पढ़ते बच्चे की आंखें बंद होने लगती हैं? - फोटो : Adobe Stock

पढ़ाई की जगह का भी पड़ता है असर
बहुत गर्म, बंद या कम रोशनी वाली जगह पर पढ़ने से बच्चा ज्यादा सुस्त महसूस कर सकता है। पढ़ाई की जगह पर अच्छी रोशनी और हवा होनी चाहिए। बच्चे को बिस्तर पर लेटकर पढ़ाने के बजाय टेबल-कुर्सी पर सीधा बैठाकर पढ़ाना भी बेहतर रहता है। इससे पढ़ाई और सोने की जगह का फर्क बना रहता है और बच्चे भी पढ़ने में रुचि दिखाते हैं। 

सिर्फ किताब पढ़ने के बजाय तरीका बदलें
अगर बच्चा सिर्फ किताब देखकर पढ़ता रहता है तो कुछ देर बाद उसका ध्यान हट सकता है। उसे पढ़ी हुई चीज अपने शब्दों में बताने को कहें, सवाल पूछें या किसी टॉपिक को बोलकर समझाने दें। इससे बच्चा पढ़ाई में ज्यादा शामिल रहता है और ऊंघने की संभावना कम हो सकती है। यही नहीं, अगर टॉपिक उनकी रुचि का होता है तो वह उत्साहित होकर उसका जवाब देते हैं।

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पढ़ते-पढ़ते बच्चे की आंखें बंद होने लगती हैं? - फोटो : Adobe Stock

बार-बार ऐसा हो तो इसे नजरअंदाज न करें
अगर बच्चा अच्छी नींद लेने के बावजूद रोज पढ़ते समय बहुत ज्यादा सोता है, दिनभर सुस्त रहता है या उसकी नींद और पढ़ाई की परेशानी लगातार बनी रहती है तो पेरेंट्स को डॉक्टर से बात करनी चाहिए। हर बार सिर्फ आलस या पढ़ाई में मन न लगने को इसकी वजह मानना सही नहीं है।

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