बजरंग पूनिया
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गोल्डकोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड और फिर जकार्ता में खेले गए 2018 एशियाई खेलों के गोल्ड मेडलिस्ट इस इस पहलवान को कुश्ती विरासत में मिली। पिता बलवान पूनिया भी एक पहलवान थे, लेकिन आर्थिक तंगी और खराब हालातों के चलते उन्हें कभी खुद को साबित करने का मौका नहीं मिला।