महात्मा विदुर की गिनती महाभारत के बुद्धिजीवियों में की जाती थी। ये बहुत कुशाग्र बुद्धि, दूरदर्शी और सरल स्वाभाव के थे। महात्मा विदुर को धर्मराज का अवतार भी कहा जाता है। महात्मा विदुर पांडु और धृतराष्ट्र के भाई एवं पांडवों, कौरवों के काका थे। ये हर कार्य में कुशल और श्रेष्ठ थे परंतु इनका जन्म एक दासी के गर्भ से होने के कारण ये हस्तिनापुर राज्य के राजा नहीं बना पाए। ये हस्तिनापुर के महामंत्री थे। महाराज धृतराष्ट्र हर विषय पर विदुर जी से खुलकर चर्चा करते थे। कहा जाता है कि विदुर जी और महाराज धृतराष्ट्र के बीच का संवाद ही विदुर नीति के रूप में उपलब्ध है। आज के समय में भी विदुर जी की बताई गई नीतियां बहुत लाभप्रद और प्रासंगिक हैं। महात्मा विदुर ने विदुर नीति में कुछ गुणों के बारे में बताया गया है। जिन लोगों में ये गुण होते हैं उनका सदा कल्याण होता है और वे सदैव मान-सम्मान प्राप्त करते हैं।
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धर्म का आचरण करने वाला
विदुर नीति के अनुसार जो व्यक्ति धर्म का आचरण करता है, उसका सदैव कल्याण होता है। धर्म मनुष्य को सही और गलत का फर्क करना सिखाता है। जो व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलता है वह सदैव सही मार्ग पर रहता है और गलत कार्यों से स्वयं को बचाकर रखता है।
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क्षमा करने वाला
क्षमा करने या फिर क्षमा मांगने से कोई भी बड़ा या छोटा नहीं होता है। क्षमा कर देने से शांति बनी रहती है। क्षमा करना श्रेष्ठता का गुण होता है इसलिए क्षमा करना ही उचित रहता है। क्षमा करने से स्वयं को आत्मिक शांति का अनुभव होता है।
ज्ञानी व्यक्ति हर जगह सम्मान प्राप्त करता है, इसलिए सदैव ज्ञान प्राप्त करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। विद्या व्यक्ति को जीवन में सफलता सम्मान और धन वैभव सब कुछ प्रदान करती है।