महाभारत में महात्मा विदुर की गिनती बुद्धिजीवियों में की जाती थी। ये अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के होने के साथ ही दूरदर्शी भी थे। इनका स्वभाव अत्यंत सरल और विनम्र था। महाभारतकाल में विदुर जी अपने धार्मिक निर्णयों के लिए जाने जाते थे। ये धृतराषट्र व पांडु की तरह ऋषि वेदव्यास के पुत्र थे परंतु इनका जन्म एक दासी के गर्भ से हुआ था, जिसके कारण सभी गुणों से परिपूर्ण होने पर भी ये राजा नहीं बन पाए। ये हस्तिनापुर के महामंत्री थे। इन्हें दूरदर्शी, बुद्धिमान और कुशल राजनीतिज्ञ माना जाता था। धृतराष्ट्र हर विषय पर विदुर जी से सलाह मशवरा लिया करते थे। विदुर और धृतराष्ट्र के मध्य का वार्तालाप विदुर नीति के रुप में आज भी प्रासंगिक है। इनके द्वारा धन, गृहस्थ जीवन, राजनीति जैसे सभी मसलों पर का जिक्र विदुर नीति में किया गया है। महात्मा विदुर ने धन के विषय में महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। जिसके अनुसार तीन ऐसे लोगों के विषय में बताया गया है, जिन्हें कभी भी अपना धन कर्ज में या फिर अन्य किसी कारण से भी नहीं देना चाहिए। ऐसे लोगों को धन देने से आपको धन हानि तो उठानी ही पड़ती है साथ ही में आपको पाप का भागी भी बनना पड़ता है। तो आइए जानते हैं कि कौन हैं वे लोग जिन्हें नहीं देना चाहिए धन।