कबीर दास जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय ।
जो मन देखा आपना, मुझ से बुरा न कोय ।
इस दोहे में कबीर दास जी कहते हैं कि मैं सारा जीवन दूसरों की बुराइयां देखने में लगा रहा लेकिन जब मैंने खुद अपने मन में झांका तो पाया कि मुझसे बुरा कोई मनुष्य नहीं है। यहां पर कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य दूसरे में बुराईयां खोजता है जबकि यदि स्वयं के भीतर देखा जाए तो बहुत सी बुराईयां हैं।