गीता श्लोक
क्रोध का त्याग करें, यह भ्रम पैदा करता है
क्रोध हर मनुष्य के दिमाग में पैदा होता है। यानी क्रोध एक सामान्य मानव प्रकिया है। गीता में बताया गया है कि मन में क्रोध पैदा होने से व्यक्ति के भीतर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। क्रोध आने पर मनुष्य का मस्तिष्क सही और गलत में अंतर नहीं पहचान पाता है। क्रोध आने पर मनुष्य को हमेसा शांत रहने का प्रयास करना चाहिए।