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Janmashtami 2020: भगवान कृष्ण के जीवन से इन 8 बातों को अपनाएं और जीवन को बनाएं सफल

Wed, 12 Aug 2020 06:54 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Happy Janmashtami 2020
Happy Janmashtami 2020: हिंदू धर्म में गीता एक प्रमुख पुस्तक है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश और  जीवन का सार है। गीता में धर्म से जुड़े कई उपदेश दिए गए हैं जिसे महाभारत के युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिए थे। गीता के उपदेश जहां एक तरफ व्यक्ति के जीवन से जुड़ी तमाम तरह की समस्याओं को निवारण करती है तो वहीं दूसरी तरफ एक सफल जीवन जीने के लिए रास्ता भी दिखाती है।  जन्माष्टमी के अवसर पर आइए जानते हैं जीवन को सफल बनाने के लिए भगवान कृष्ण के द्वारा गीता में बताए गए कुछ अचूक मंत्र
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gita
शरीर अस्थायी जबकी आत्मा स्थायी 
महाभारत के युद्ध में भगवान कृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं कि मानव का शरीर मात्र एक कपड़े का टुकड़ा है। जबकि आत्मा अमर है वह हर जन्म में अलग-अलग कपड़े के टुकड़े में आती और जाती है। गीता के इस श्लोक का अर्थ है कि मानव का शरीर आत्मा का अस्थाई कपड़ा है। व्यक्ति की पहचान आत्मा से होती है न की शरीर से। 
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गीता श्लोक
क्रोध का त्याग करें, यह भ्रम पैदा करता है
क्रोध हर मनुष्य के दिमाग में पैदा होता है। यानी क्रोध एक सामान्य मानव प्रकिया है। गीता में बताया गया है कि मन में क्रोध पैदा होने से व्यक्ति के भीतर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। क्रोध आने पर मनुष्य का मस्तिष्क सही और गलत में अंतर नहीं पहचान पाता है। क्रोध आने पर मनुष्य को हमेसा शांत रहने का प्रयास करना चाहिए।

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राधा-कृष्ण की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
किसी चीज की अति घातक है
भगवान कृष्ण अपने मित्र अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए कहते हैं कि जीवन में  संतुलन बनाए रखने के लिए किसी भी चीज की अति नहीं करनी चाहिए। किसी भी चीज की अति करना बहुत ही घातक सिद्ध होती है। चाहे मधुरता की अति हो या किसी से कड़वाहट की अति दोनों ही खराब होती है।
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janmashtami
स्वार्थी न बनें
इंसान का स्वार्थी बनना उसके लिए हालात को नकारात्मक बना देता है। ऐसे में अगर अपने जीवन को सुखमय और सौहार्द पूर्वक बनाने के लिए स्वार्थ की भावना से ऊपर उठाना चाहिए।
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केशव मंदिर में कान्हा का अभिषेक करते सेवायत - फोटो : अमर उजाला
लगातार करते हैं कर्म
गीता के उपदेश में भगवान कृष्ण कहते हैं कि व्यक्ति को कभी भी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटना चाहिए। जैसा कर्म करेंगे वैसा ही आपको फल भी प्राप्त होगा। इसलिए कर्म करते जाइए और फल की चिंता न करें। कर्म करते समय व्यक्ति को  परिणाम की चिंता से मुक्त रहना चाहिए।
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janmashtami - फोटो : amar ujala
इच्छाओं को नियंत्रित रखें
गीता में कहा गया है कि व्यक्ति की इच्छाएं ही उसको तमाम तरह की परेशानियों से घेरे रहती हैं। कहने का अर्थ है जितनी ज्यादा इच्छाएं होंगी उतनी ही परेशानियां आएंगी। ऐसे में हमेशा इच्छाओं का कंट्रोल में रखना चाहिए।
 

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janmashtami - फोटो : amar ujala
किसी पर शक करने के स्वभाव से बचें
किसी पर बात बात में संदेह करना रिश्तों को कमजोर और खोलला करने के लिए काफी होता है। बात बात पर किसी पर संदेह करने से इंसान को दुख ही पहुंचता है।
 
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Krishna janmashtami
मृत्यु के भय का त्याग करें
गीता के उपदेश में कहा गया है कि मृत्यु ही सत्य है। ऐसे में मृत्यु का भय होना व्यक्ति की खुशियों को बाधित कर सकता है। इसलिए मृत्यु के डर से जीना नहीं चाहिए और मृत्यु के भय का त्याग कर अपना काम करना चाहिए।
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