श्री कृष्ण जन्माष्टमी
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पहला मंत्र- शान्त और धैर्य स्वभाव रखकर काम करना
भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के बारे में हर किसी को पता है कि वह बचपन में बहुत ही शरारती स्वभाव के थे। लेकिन जब भी उन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया उनका स्वभाव हमेशा शांत रहा। कृष्ण जी भगवान विष्णु के अवतार थे और वे यह बात जानते थे कि कंस उन्हें मारना चाहते थे, फिर भी वे शांत रहे और समय आने पर कंस के हर प्रहार का मुंहतोड़ जवाब दिया। इससे सीख मिलती है कि कठिन समय में भी अपने मन को शांत रखना चाहिए। विपरीत परिस्थितियों में भी शान्त स्वभाव का त्याग नहीं करना चाहिए।