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सफल इंसान बनने के लिए अपनाएं गोस्वामी तुलसीदासजी के इस मंत्र को...

Wed, 29 May 2019 04:40 PM IST
कशिश मिश्रा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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तुलसीदास की अमृतवाणी
हमारे शास्त्रों में कुछ ऐसे दोहे बताए गए हैं जिसका अर्थ जान लेने और उसका पालन करने से जीवन सार्थक हो जाता है। आइए जानते हैं तुलसीदासजी के दोहे के बारे में जिसे पढ़ने से आपके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे और आपके अंदर से ईर्ष्या की भावना खत्म हो जाएगी। 
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तुलसीदास की अमृतवाणी - फोटो : social media
तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक ।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसे एक ।


अर्थ-  गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, विपत्ति के समय में आपको घबराकर हार नहीं माननी चाहिए। ऐसी स्थिति में आपको अपने अच्छे कर्म, सही विवेक और बुद्धि से काम लेना चाहिए। मुश्किल समय में साहस और अच्छे कर्म ही आपका साथ देते हैं। 
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तुलसीदास की अमृतवाणी
राम नाम  मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर। 


अर्थ-तुलसीदास जी कहते है अगर आप अपने चारों तरफ खुशहाली चाहते हैं तो अपने वाणी पर काबू रखें। गलत शब्द बोलने की जगह राम नाम जपते रहिए इससे आप भी खुश रहेंगे और आपके घरवाले भी खुश रहेंगे। 

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तुलसीदास की अमृतवाणी
नामु राम  को कलपतरु कलि कल्यान निवासु। 
जो सिमरत  भयो भाँग ते तुलसी तुलसीदास। 


अर्थ- राम का नाम लेने से आपका मन साफ रहता है। किसी भी काम को करने से पहले राम का नाम लीजिए। तुलसीदास जी भी राम का नाम लेते-लेते अपने आप को तुलसी के पौधे जैसा पवित्र मानने लगे थें। 
 
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तुलसीदास की अमृतवाणी - फोटो : social media
तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।
सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि। 


अर्थ-तुलसी दास जी कहते हैं सुंदर रूप देखकर न सिर्फ मूर्ख बल्कि चतुर इंसान भी धोखा खा जाते हैं। जैसे मोर दिखने में बहुत सुंदर लगते हैं लेकिन उनका भोजन सांप है। 

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