आचार्य चाणक्य
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आचार्य चाणक्य कहते हैं कि वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, जिन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दी। अशिक्षित व्यक्ति विद्वानों के समूह में स्वयं को अपमानित महसूस करता है। शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूंछ के जानवर जैसा होता है। शिक्षा के अभाव में मनुष्य का जीवन अंधकारमय रहता है इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को उत्तम शिक्षा प्रदान करें, जिससे वे स्वयं के साथ समाज को भी सुशोभित करें।