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Chanakya niti: अगर बच्चों का भविष्य बनाना चाहते हैं उज्जवल तो माता पिता को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान

Sun, 25 Apr 2021 05:23 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान होने के साथ ही एक योग्य शिक्षक भी थे। चाणक्य द्वारा लिखित नीति शास्त्र की बातें आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। चाणक्य की नीतियां भले कठोर लगती हैं लेकिन ये आपको जीवन की सच्चाई से अवगत कराती हैं और सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। नीतिशास्त्र में जीवन के हर पहलू से संबंधित महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। चाणक्य कहते हैं कि बचपन में संतान को जैसी शिक्षा दी जाती है, उनका विकास उसी प्रकार होता है और यही उसके भविष्य की नींव रखता है इसलिए प्रत्येक माता पिता को कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। जानते हैं कि क्या कहती है भविष्य नीति।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि माता पिता का कर्तव्य है कि वे बचपन से ही उन्हें सही मार्ग पर चलने की शिक्षा दें। बालपन के समय बच्चा कच्ची मिट्टी की तरह होता है। जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी को एक सही आकार प्रदान करता है उसी प्रकार माता को बचपन से ही बच्चे में उन उत्तम चरित्र का निर्माण करना चाहिए। उत्तम चरित्र और गुणों का बालक माता पिता के साथ पूरे कुल की शोभा बढ़ाता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, जिन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दी। अशिक्षित व्यक्ति विद्वानों के समूह में स्वयं को अपमानित महसूस करता है। शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूंछ के जानवर जैसा होता है। शिक्षा के अभाव में मनुष्य का जीवन अंधकारमय रहता है इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को उत्तम शिक्षा प्रदान करें, जिससे वे स्वयं के साथ समाज को भी सुशोभित करें।
 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
चाणक्य कहते हैं कि बच्चों में अनुशासन होना बहुत जरूरी होता है इसलिए बचपन से ही बच्चों में अनुशासन की भावना लाना बहुत आवश्यक होता है। अधिक लाड़ प्यार करने से बच्चे उद्दंड हो जातें हैं और उनमें अनेक दोष उत्पन्न हो जाते हैं इसलिए लाड़ प्यार के साथ ही बालक को डांटना भी आवश्यक होता है।
 
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