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सही मायने में पिता, पुत्र, मित्र और जीवन साथी क्या हैं?आचार्य चाणक्य ने बताई हैं ये महत्वपूर्ण बातें

Mon, 27 Sep 2021 05:58 PM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य एक कुशाग्र बुद्धि के श्रेष्ठ विद्वान और एक योग्य मार्गदर्शक भी थे। इन्होंने अपनी रणनीति, कूटनीति और बुद्धिमत्ता के बल पर ही अपने शत्रु घनानंद का नाश किया और चंद्रगुप्त मौर्य को एक शासक के रुप में स्थापित किया, साथ ही हमेशा उनके मार्गदर्शक बने। इसके अलावा आचार्य चाणक्य ने विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को शिक्षित भी किया। इन्हें बहुत से विषयों की गहरी जानकारी होने के साथ ही व्यवहारिक जीवन की भी अच्छी समझ थी। इनको द्वारा लिखी गई नीतियां आज के जीवन में भी उतनी ही प्रासंगिक लगती हैं जितनी उस समय थी। आचार्य चाणक्य ने नीतिशास्त्र में जीवन के विभिन्न पहलू चाहें वह 'पारिवारिक जीवन हो या मित्रता, दुश्मनी और धन संबंधी कार्य' सभी के बारे में विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए हैं। नीतिशास्त्र में रिश्तों की परख को लेकर महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। तो चलिए जानते हैं कि पिता, पुत्र, मित्र और जीवन साथी को लेकर क्या कहती है चाणक्य नीति।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
पुत्र वही जो भक्त हो
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि पुत्र वही जो भक्त हो। यानी पुत्र को अपने पिता की आज्ञा का पालन बिना किसी प्रश्न के करना चाहिए। पिता हमारे जीवन का आधार होता है। एक पिता संतान के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए दिन-रात प्रयास करता है, इसलिए सही मायने में पुत्र वही है जो अपने पिता की आज्ञा का पालन करता हो। 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
पिता वही जो पालन करे
एक पिता का कर्तव्य होता है कि वह अपनी संतान का पालन पोषण करे, उसके आने वाले जीवन को उज्जवल बनाए, इसलिए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि पिता वही जो पालन करे। संतान के लिए पिता ही उसका सबसे पहला आदर्श होता है, इसलिए पिता को अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन भलि प्रकार से करना चाहिए।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
मित्र वही जो विश्वास पात्र हो
एक मित्र ही होता है जिससे व्यक्ति हर विषय पर खुलकर बात करता है और अपने जीवन के हर सुख-दुख,राज की बातें सभी साझा करता है, सच्चे मायने में मित्र वही होता है जो अपने मित्र की बातों को किसी और से न कहे। यही कारण है कि आचार्य चाणक्य कहते हैं, 'मित्र वही जिस पर विश्वास किया जा सके'।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : social media
जीवन साथी वही जो सुख दे
यहां पर केवल शारीरिक सुख नहीं बल्कि जीवन में प्रसन्नता की बात कही गई है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जीवन साथी वही है जो हर परिस्थिति में साथ निभाए और दुख की घड़ी में भी अपने साथी को प्रसन्न रख सके या सुख प्रदान कर सके।
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