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यह 10 स्थान आज भी बताते हैं कि यहां मिले थे राधा कृष्ण

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भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं में सबसे सुंदर प्रसंग राधा कृष्ण के मिलन और प्रेम का है। ऐसे में जन्माष्टमी के मौके पर इनकी लीलाओं की झलक न हो तो भक्ति का आनंद अधूरा सा लगेगा। इसलिए आइए देखें भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा की लीलाओं को औ जानें कहां-कहां कैसे मिले थे राधा कृष्ण।
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यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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यह है भंडीर वन। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार यहां पर भगवान श्री कृष्‍ण और राधा की पहली अलौक‌िक भेंट हुई थी। एक बार श्री कृष्‍ण को गोद में लेकर वसुदेव जी यहां से गुजर रहे थे तभी देवी राधा वहां प्रकट हुई और ब्रह्मा जी को पुरोह‌ित बनाकर श्री कृष्‍ण से व‌िवाह क‌िया था। इस घटना का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में म‌िलता है।
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यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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यह है वृंदावन में यमुना तट पर स्‍थ‌ित न‌‌िध‌िवन। कहते हैं इस वन में ज‌ितने वृक्ष हैं वह सभी गोप‌ियां हैं जो रात के समय अपने वास्तव‌िक रुप में आकर रास लीला करते हैं। क्योंक‌ि यहीं पर भगवान श्री कृष्‍ण ने कार्त‌िक पूर्ण‌िमा की उज्जवल चांदनी में रास का आयोजन क‌िया था।

यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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एक कथा यह भी है क‌ि बाल कृष्‍ण से व‌‌िवाह से पूर्व देवी राधा श्री कृष्‍ण से लौक‌िक रुप में म‌िल चुकी थी। यह अवसर था श्री कृष्‍ण के जन्म का उत्सव। इस समय श्री राधा जी जन्मोत्सव में शाम‌िल होने के ल‌िए अपनी माता कीर्ति के साथ नंदगांव आई थी यहां श्री कृष्ण पालने में झूल रहे थे और राधा माता की गोद में थी। उस समय बालक श्री कृष्‍ण एक द‌िन के और देवी राधा ग्यारह माह की थी।
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यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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संकेत में स्‍थ‌ित यह हैं संकेत ब‌िहारी जी। नंद गांव से चार मील की दूरी पर बसा है बरसाना गांव। बरसाना राधा जी की जन्मस्थली है। नंदगांव और बरसाना के बीच में एक गांव है 'संकेत' कहलाता है। कहते हैं लौक‌िक जगत में श्री कृष्‍ण और राधा की पहली मुलाकात यहीं पर हुई थी। यहीं से श्री कृष्‍ण और राधा का लौक‌िक प्रेम शुरु हुआ था। इसल‌िए यह स्‍थान राधा कृष्‍ण के भक्तों के ल‌िए बहुत ही खास माना जाता है।
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यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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यह है बरसाने का मानगढ़। कहते हैं यहां पर राधा एक बार ऐसा रुठी की श्री कृष्‍ण के सारे जतन बेकार गए। अंत में श्री कृष्‍ण ने सख‌ियों की मदद से रुठी राधा को मनाया। इसल‌िए इस स्‍थान को मानगढ़ के नाम से जाना जाता है।
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यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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बरसाने के पास एक छोटा सा स्‍थान है मोर कुटी। कहते हैं यहां पर भगवान श्री कृष्‍ण ने राधा के कहने पर मोर के साथ नृत्य प्रत‌ियोग‌िता की थी।

यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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यह है गहवर वन। कहते है इस वन को देवी राधा ने खुद अपने हाथों से सजाया था। यहां पर देवी राधा और श्री कृष्‍ण म‌िला करते थे। कहते हैं यह वन भगवान श्री कृष्‍ण को सबसे अध‌िक प्र‌िय था।

यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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यह है कुमुदनी कुंड ज‌िसे व‌िहार कुंड भी कहते हैं। कहते हैं क‌ि गाय चराते हुए यहां पर श्री कृष्‍ण और राधा म‌िला करते थे। इस कुंड में सखा और सख‌ियों की नजरों से छुपकर राधा कृष्‍ण जल क्र‌ीड़ा भी क‌िया करते थे। कृष्‍ण जब तक नंदगांव में रहे तब तक राधा कृष्‍ण की मुलाकात होती रही और इनके कई म‌िलन स्‍थल रहे। लेक‌िन नंदगांव से जाने के बाद श्री कृष्‍ण और राधा का म‌िलन बस बए बार हुआ आइये वह भी देख लें, कहां?
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यह 10 स्‍थान आज भी बताते हैं क‌ि यहां म‌िले थे राधा कृष्‍ण

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नंदगांव से जब श्री कृष्‍ण मथुरा आए तो उस समय राधा को वचन द‌िया क‌ि अब उनकी मुलाकात कुरुक्षेत्र होगी। सूर्यग्रहण के मौके पर देवी राधा और मां यशोदा कुरुक्षेत्र में स्‍नान के ल‌िए आई थी उस समय राधा और कृष्‍ण फ‌िर से म‌िले थे। यहां इस बात का गवाह एक तमाल का वृक्ष है।
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