krishna
भाग्येश और दशमेश जो कि शनि है, रिपु भाव में स्थित होने के कारण वे राक्षसों का वध करते हैं। कृष्ण ने शिशुपाल, दंतवक्र, कंस आदि तमाम राक्षसों का वध किया था। शनि और राहु के छठे भाव में स्थित होने से माखन-चोर कहलाए। दशमेश छठे भाव में चंद्र और शुक्र दोनों केंद्र में है। जिससे इनकी मोहिनी त्रिभंगी मुद्रा के दर्शन होते हैं।