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Sharad Purnima 2021: जानिए कैसे शरद पूर्णिमा की शीतल किरणों का सेवन करने से सेहत को होता है फायदा

Tue, 19 Oct 2021 07:12 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
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sharad purnima - फोटो : अमर उजाला
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कोजोगार पूर्णिमा, रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस बार यह पूर्णिमा 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। धर्मग्रंथों के अनुसार कुछ रातों का बहुत महत्व है जैसे नवरात्रि, शिवरात्रि और इनके अलावा शरद पूर्णिमा भी शामिल है। इसी दिन से पुण्य प्रदाता कार्तिक मास के यम नियम, व्रत ,स्न्नान और दीपदान का आरम्भ हो जाता हैं। शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूणिमा तक नित्य प्रति संध्या के समय तुलसी और खुले आकाश के नीचे दीपदान करने से दुःख, दरिद्र का नाश होता हैं।
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sharad purnima
खीर का महत्व
श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार चन्द्रमा को औषधि का देवता माना जाता है। इस दिन चांद अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करता है। इस दिन चांदनी रात में दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है इससे विषाणु दूर रहते हैं। शरद पूर्णिमा की शीतल चाँदनी में खीर रखने का विधान है, खीर में मिश्रित दूध, चीनी और चावल के कारक भी चन्द्रमा ही है, अतः इनमें चन्द्रमा का प्रभाव सर्वाधिक रहता है। 3-4 घंटे तक खीर पर जब चन्द्रमा की किरणें पड़ती है तो यही खीर अमृत तुल्य हो जाती है, जिसको प्रसाद रूप में ग्रहण करने से व्यक्ति वर्ष भर निरोग रहता है। उसका शरीर पुष्ट और कांतिवान हो जाता है। प्राकृतिक चिकित्सालयों में तो इस खीर का सेवन कुछ औषधियां मिलाकर दमा के रोगियों को भी कराया जाता है। यह खीर पित्तशामक, शीतल, सात्विक होने के साथ वर्ष भर प्रसन्नता और आरोग्यता में सहायक सिद्ध होती है। इससे चित्त को शांति मिलती है और साथ ही पित्तजनित समस्त रोगों का प्रकोप भी शांत हो जाता है।

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sharad purnima
शीतल किरणों का करें सेवन
प्रत्येक व्यक्ति को इस रात कम से कम 30 मिनट तक चंद्रमा की शीतल चांदनी में बैठना चाहिए। इस दिन बनने वाला वातावरण दमा के रोगियों के लिए विशेषकर लाभकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था।मान्यता है कि इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है,जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है।   
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शुभ शरद पूर्णिमा - फोटो : अमर उजाला
बढ़ती हैं नेत्र ज्योति
शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा की तरफ एकटक निहारने से या सुई में धागा पिरोने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक घंटे तक शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में बैठना चाहिए। 10 से 12 बजे का समय जब चंद्रमा की रौशनी अपने चरम पर होती हैं,उपयुक्त होता हैं।
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