ज्योतिष में जितना महत्व शनिदेव का है उतना ही महत्व उनकी पूजा-आराधना करने में है। शनिदेव भगवान सूर्य और माता छाया की संतान हैं। ज्योतिष में शनिदेव के बारे में मान्यता है कि ये व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। शनि को भगवान शिव ने न्याय का देवता होने का आशीर्वाद दिया है। ज्योतिष की गणना में शनि का विशेष महत्व होता है। वैदिक ज्योतिष में शनि को पापी ग्रह माना गया है। सभी ग्रहों में शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। यह एक राशि से दूसरी राशि में अपना स्थान बदलने के लिए करीब ढाई वर्षों का समय लेते हैं। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा बहुत ही कष्टकारी मानी गई है। मान्यता है कि शनि की अशुभ छाया अगर किसी भी व्यक्ति पर जाय तो परेशानियों से जूझने लगता है। शनि के प्रभाव को कम करने के लिए और अशुभ छाया से बचने के लिए शनि पूजा को महत्व दिया जाता है। आज हम आपको शनि की पूजा करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इसके बारे में बताने जा रहे हैं।