हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के दोनों पक्षों, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस बार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 सितंबर को पड़ रही है। प्रदोष व्रत का फल और नाम उसके वार के अनुसार होता है। इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ रहा है, इसलिए यह शनिप्रदोष व्रत कहलाएगा। इस दिन विधिवत व्रत और पूजन करने से भगवान शिव के साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। इस भगवान शिव की पूजा करने के साथ शनिदेव की पूजा अर्चना भी करनी चाहिए। इससे आपके जीवन में आने वाली समस्याओं से मुक्ति प्राप्तो होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। तो आइए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि और लाभ...