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Sawan 2024: भगवान शिव ने क्यों धारण किया नाग? जानिए इसके पीछे की कहानी

Mon, 29 Jul 2024 07:14 AM IST
शिखर बरनवाल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

भगवान भोलेनाथ अपने शरीर पर भस्म, अपनी जटा में गंगा, माथे पर चंद्रमा और गले में नाग धारण करते हैं। इन सभी चीजों को धारण करने के पीछे अलग-अलग किस्से हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि भगवान शिव के नाग धारण करने के पीछे क्या कहानी है?
 
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Shivling Puja Vidhi - फोटो : freepik
भगवान भोलेनाथ का रूप जितना रहस्यमयी और विचित्र है, उतना ही आकर्षक भी है। वे अपने शरीर पर भस्म, अपनी जटा में गंगा, माथे पर चंद्रमा और गले में नाग धारण करते हैं। इन सभी चीजों को धारण करने के पीछे अलग-अलग किस्से और मान्यताएं हैं। असल में भगवान शिव न केवल मनुष्यों पर बल्कि अन्य जीवों पर भी अपनी कृपा बनाए रखते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है उनके गले में नाग और वाहन नंदी। भगवान भोलेनाथ एक ऐसे देवता हैं जो समाज में सबसे बहिष्कृत चीजों को अपना साथी मानते हैं। जैसे सर्प एक ऐसा सरीसृप है जिससे मनुष्य डरता है, भोलेनाथ ने उसे अपने गले का हार बना लिया, उसे सम्मान दे दिया। लोग श्मशान घाट में जानें से डरते हैं, भगवान शिव ने वहां का भस्म ही अपना लिबास बना लिया। कैलाश पर्वत जहां इंसानों पहुंचना असंभव हुआ करता था, भगवान शिव ने उसे अपना घर बना लिया। खैर, आइए इस लेख में जानते हैं कि भगवान शिव के नाग धारण करने के पीछे क्या कहानी है?
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सावन में करें इन चीजों का दान - फोटो : अमर उजाला
शिव जी के गले में क्यों लिपटा रहता है सांप?
धार्मिक कथाओं के अनुसार, नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे, वे हमेशा शिव जी की पूजा करने में लीन रहते थे। शास्त्रों के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान नागराज वासुकी ने रस्सी का काम किया था, जिससे सागर को मथा गया था। इसके बाद नागराज वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने इन्हें नागलोक का राजा बना दिया। साथ ही अपने गले में आभूषण की भांति लिपटे रहने का वरदान दिया।
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फूल - फोटो : iStock
शिव जी के अन्य प्रतीकों का कुछ न कुछ किस्से हैं, जिसके बारे में भी आपको जानना चाहिए-
मां गंगा

धार्मिक कथाओं के अनुसार है कि देवी गंगा शिव जी के करीब रहना चाहती थीं, इसलिए धरती पर उतरने से पहले मां गंगा ने प्रचंड रूप धारण कर लिया था। कहा जाता है कि इस स्थिति को संभालने के लिए शिवजी ने गंगा को अपनी जटाओं में स्थान दिया। अगर भगवान शिव ने ऐसा नहीं किया होता तो सृष्टि की रचना प्रभावित होती।

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Sawan 2024 - फोटो : freepik
नंदी
शास्त्रों के मुताबिक नंदी और शिव एक ही हैं। ऋषि शिलाद की कठोर तपस्या के बाद शिव जी ने नंदी रूप में उनके घर जन्म लिया था। भोलेनाथ नंदी की कठोर तपस्या से प्रभावित होकर उसे अपनी प्रिय सवारी के रूप में स्वीकार किया।
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सावन सोमवार पूजा विधि - फोटो : freepik
चंद्रमा
शिव पुराण के मुताबिक चंद्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। सभी कन्याओं में चंद्रदेव रोहिणी से विशेष स्नेह करते थे। इसकी शिकायत जब अन्य कन्याओं ने दक्ष से की तो दक्ष ने चंद्रमा को क्षय होने का शाप दे दिया। इस शाप से बचने के लिए चंद्रमा ने भगवान शिव की तपस्या की। चंद्रमा की इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने चंद्रमा के प्राण बचाए और उन्हें अपने शीश पर धारण किया।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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