शारदीय नवरात्र का ज्योतिषशास्त्र में बड़ा महत्व है क्योंकि माता के आगमन और प्रस्थान से आने वाले दिनों में होने वाली घटनाओं का अंदाजा लगाया जाता है। इस बार नवरात्र का आरंभ यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि शनिवार के दिन है। इसी दिन कलश बैठाकर माता की पूजा का संकल्प लिया जाएगा।
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इस बार नवरात्र में माता आ रही हैं घोड़े पर जाएंगी मुर्गे पर, जानिए क्या है इसका मतलब
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दुर्गा पूजा
- फोटो : rakesh jha
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनिवार के दिन नवरात्र का आरंभ यह दर्शा रहा है कि माता घोड़ पर सवार होकर अपने भक्तों के घर आएंगी। शास्त्रों में कहा गया है कि 'शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता' इसका अर्थ है सोमवार व रविवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापन होने पर मां दुर्गा हाथी पर आती हैं।
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दुर्गा पूजा
शनिवार तथा मंगलवार को कलश स्थापन होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार अथवा शुक्रवार के दिन कलश स्थापन होने पर माता डोली पर चढ़कर आती हैं। बुधवार के दिन कलश स्थापन होने पर माता नाव पर सावर होकर आती हैं।
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दुर्गा पूजा
- फोटो : rakesh jha
घोड़े पर माता का आगमन इस बात की आशंका को जन्म देता है कि आने वाले दिनों में देश में बड़ा राजनीतिक उथल-पुथल होने वाला है। घोड़ा युद्ध का प्रतीक माना जाता है ऐसे में पड़ोसी देशों के साथ संबंध तल्ख होंगे युद्ध की हालात भी बन सकते हैं। बीते साल भी माता घोड़े पर आईं थी जिससे पड़ोसी देशों के साथ संबंध बनते बिगड़ते रहे और राजनीति में उथल-पुथल मचा रहा।
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नवरात्र पूजा
- फोटो : getty images
माता आगमन जहां युद्ध और आपदा का सूचक है वहीं मुर्गे पर जाना दुख, कष्ट और शोक का प्रतीक है। ऐसे में संकट पूर्ण स्थिति से निकलने के लिए इस वर्ष माता की पूजा का विशेष ध्यान रखना होगा। बीते वर्ष माता का प्रस्थान गज पर हुआ था जिससे इस वर्ष अच्छी बरसात हुई है और फसल भी अच्छे होंगे।
इस बार नवरात्र में माता आ रही हैं घोड़े पर जाएंगी मुर्गे पर, जानिए क्या है इसका मतलब
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मां दुर्गा
इस बार की नवरात्र में एक अच्छी बात है कि इस बार दस दिनों की पूजा है और ग्यारहवें दिन विजयादशमी है। ऐसा संयोग इसलिए बना क्योंकि इस बार नवरात्र में द्वितीया तिथि दो दिन है। दशहरा में पूजा के दिन का बढ़ना शुभ माना जाता है।