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Masik Shivaratri 2021: इस दिन है मासिक शिवरात्रि, जानिए इस व्रत को करने के फायदे, तिथि और व्रत पूजा विधि

Fri, 02 Apr 2021 06:24 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Masik Shivaratri 2021 - फोटो : Social media
प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनायी जाती है। इस तरह से एक चंद्र वर्ष में कुल 12 शिवरात्रि आती हैं, इस माह की शिवरात्रि 10 अप्रैल 2021 दिन गुरूवार को पड़ रही है। भगवान शिव की पूजा आराधना करने के लिए यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता अनुसार हर माह मासिक शिवरात्रि रात को साधक या उपासक भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते है। जानते हैं मासिक शिवरात्रि व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि।
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Masik Shivaratri 2021 - फोटो : google
चैत्र कृष्ण चतुर्दशी आरंभ- 10 अप्रैल 2021 दिन गुरुवार प्रातः 04 बजकर 27 मिनट से
चैत्र कृष्ण चतुर्दशी समाप्त- 11 अप्रैल 2021 दिन शुक्रवार प्रातः 06 बजकर 03 मिनट पर


 
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Masik Shivaratri 2021
मासिक शिवरात्रि का महत्व
शिव महिमा से संबंधित कई पौराणिक ग्रंथों में मासिक शिवरात्रि के महत्त्व का उल्लेख मिलता है। इस व्रत को करने से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन की समस्याओं से भी निजात मिलती है। शिवरात्रि पर भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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Masik Shivaratri 2021
शिवरात्रि पूजा सामग्री
भगवान शिव की पूजा के लिए सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, शुद्ध देशी घी, दही, शहद, गंगा जल, बेर, जौ, गाय का कच्चा दूध, कपूर, धूप, दीप, रूई, चंदन, इत्र, पंच फल, पंच मेवा, मौली, जनेऊ, पंच रस, गंध रोली, पंच मिष्ठान्न, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, दक्षिणा, चांदी, पूजा के बर्तन और आसन आदि।
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Masik Shivaratri 2021
शिवरात्रि व्रत पूजा विधि
  • मासिक शिवरात्रि का पूजा विधान त्रयोदशी तिथि यानि एक दिन पहले से ही शुरू हो जाता है। 
  • त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा आराधना करें और मासिक शिवरात्रि व्रत का संकल्प लें। 
  • चतुर्दशी के दिन प्रातः उठकर स्नान आदि करने के बाद धूप दीप जलाएं।
  • पंचामृत और गंगाजल से शिव जी का अभिषेक करें।
  • शिव जी के पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर बिल्वपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें।
  • शिव जी का स्मरण करते हुए पूरे दिन निराहार रहकर शिवरात्रि का व्रत करें। 
  • रात्रि के चारों पहर में शिव जी की पूजा करें और अगले दिन प्रातः जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और दान दक्षिणा दें, इसके बाद अपने व्रत का पारण करें। 
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