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Margashirsha Amavasya 2021: आज है मार्गशीर्ष अमावस्या, जानिए महत्व और धार्मिक अनुष्ठान

Sat, 04 Dec 2021 07:17 AM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
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अमावस्या 2021
Shani Amavasya 2021: अमावस्या तिथि को पितरों का तर्पण, अशुभ दोष निवारण आदि के लिए बहुत ही उत्तम तिथि माना जाता है। हिंदू पंचांग के हिसाब से हर माह कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या आती है। इस बार मार्गशीर्ष मास की अमावस्या आज यानि 04 दिसंबर 2021 दिन शनिवार को पड़ रही है। यह अमावस्या शनिवार को पड़ने के कारण शनि अमावस्या कहलाएगी। शनिवार का दिन होने पर अमावस्या तिथि का महातम्य और भी बढ़ जाता है। शनि अमावस्या होने पर पितरों के साथ शनिदेव को भी प्रसन्न करने के लिए यह दिन अति उत्तम रहता है। पूर्णिमा तिथि की भांति अमावस्या तिथि का भी शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पवित्र नदियों या सरोवर में स्नान व पितरों के निमित्त दान करने का बहुत महत्व माना गया है। तो चलिए जानते हैं मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व और धार्मिक अनुष्ठान।


 
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अमावस्या 2021
मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि का महत्व-
शास्त्रों में अमावस्या तिथि का बहुत महत्व बताया गया है लेकिन मार्गशीर्ष की अमावस्या को बहुत ही पुण्य फलदायी माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करना बेहद शुभफलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान आदि करने से पितृ प्रसन्न होते हैं व अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह दिन कालसर्प दोष निवारण, पितृदोष निवारण आदि के लिए भी बहुत उत्तम माना गया है। इस बार शनि अमावस्या होने के कारण शनिदेव की कृपा पाने के लिए धार्मिक अनुष्ठान करना भी श्रेष्ठ रहेगा।
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अमावस्या 2021 - फोटो : अमर उजाला
अमावस्या तिथि मुहुर्त-
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अमावस्य तिथि 03 दिसंबर 2021 शाम 04 बजकर 55 मिनट से शुरु होगी और 04 दिसंबर 2021 दोपहर 01 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। अमावस्या तिथि का स्नान-दान 04 दिसंबर को किया जाएगा।
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अमावस्या 2021 - फोटो : अमर उजाला
अमावस्या तिथि धार्मिक अनुष्ठान-
इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी में जाकर स्नान करना चाहिए और अपने पितरों के निमित्त तर्पण व दान करना चाहिए। यदि हो सके तो इस दिन व्रत रखें और क्षमता अनुसार, जरुरतमंदो में अन्न, वस्त्र आदि का दान करें। संध्या के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इसी के साथ पीपल की परिक्रमा भी करनी चाहिए।
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