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Guru Pradosh Vrat 2021: आज है गुरु प्रदोष व्रत है, जानिए इसका महत्व, मंत्र और व्रत रखने की विधि

Thu, 02 Dec 2021 03:21 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Pradosh Vrat 2021 - फोटो : self
Pradosh Vrat 2021: आज मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत है। हिंदू धर्म का पालन करने वाले लोग हर महीने दो बार त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत करते हैं। इस व्रत की तिथि वैदिक हिंदू कैलेंडर द्वारा निर्धारित की जाती है जिसे पंचांग कहा जाता है। प्रदोष व्रत उन व्रतों में से एक है जो भगवान शिव के भक्तों द्वारा रखे जाते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह चंद्र पखवाड़े की प्रत्येक त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। प्रदोष व्रत प्रदोष काल के दौरान मनाया जाता है जो सूर्यास्त के 1.5 घंटे पहले और 1.5 घंटे बाद की अवधि है। कुल मिलकर यह अवधि 3 घंटे है। यह समय शिव पूजा के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।  यदि प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ता है तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसे गुरुवार प्रदोषम के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद मिलती है और सफलता, ज्ञान और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। 
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Pradosh Vrat 2021
गुरु प्रदोष व्रत तिथि 

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 2 दिसंबर,गुरुवार को है। 
गुरू प्रदोष व्रत तिथि आरंभ:  02 दिसंबर, प्रातः 02 : 05 मिनट से
गुरू प्रदोष व्रत तिथि समाप्त:  02 दिसंबर, रात्रि 10:56 मिनट पर
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Pradosh Vrat 2021
गुरु प्रदोष व्रत 2021 का महत्व
जो लोग इस दिन भर उपवास रखते हैं, वे लंबी उम्र, शांति और सौभाग्य की प्रार्थना करते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रदोष व्रत का पालन करने वाले अपने सभी अतीत और वर्तमान पापों से मुक्त हो जाते हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शंकर ने चंद्र देव को एक राजा के श्राप से मुक्ति दिलाई थी। यदि व्रत 'श्रद्धा' के साथ रखा जाता है और दिन के सभी अनुष्ठानों का पालन दृढ़ विश्वास के साथ किया जाता है, तो भगवान महादेव भक्त के कष्टों को समाप्त करते हैं और उसे स्वास्थ्य, धन और ज्ञान का आशीर्वाद देते हैं। गुरु प्रदोष व्रत दुश्मनों पर जीत हासिल करने और सफलता, ज्ञान और अच्छे स्वास्थ्य लाने में मदद करता है।

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Pradosh Vrat 2021 - फोटो : Social media
गुरु प्रदोष व्रत में करें इन मंत्रों का जाप 
भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए गुरु प्रदोष व्रत के दिन नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें - 
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।
  • ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा।
  • ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
  • ॐ आशुतोषाय नमः।
  • ॐ पार्वतीपतये नमः।
  • ॐ नमो नीलकण्ठाय।
  • ॐ नमः शिवाय।
  •  इं क्षं मं औं अं।
  •  ऊर्ध्व भू फट्।
  •   प्रौं ह्रीं ठः।
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Pradosh Vrat 2021 - फोटो : Pixabay
गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि
गुरु प्रदोष व्रत प्रदोष व्रत एक बहुत ही शुभ मुहूर्त है और यह आपके जीवन को और शुभट प्रदान करेगा यदि आप प्रदोष व्रत की पूजा नीचे दिए गआए विधि विधान से करते हैं।
  • प्रदोष व्रत से एक दिन पहले भगवान गणेश को षोडशोपचार विधि से विधिवत पूजा करनी चाहिए और रात भर शिव-पार्वती और भगवान गणेश के भजनों से जागना चाहिए।
  • सूर्योदय से पहले दिनचर्या और घर के कामों से निवृत होकर  पूजा के समय ध्यान लगाना चाहिए और भगवान शिव, श्रीगणेश, देवी पार्वती, कार्तिक और नंदी की पूजा करनी चाहिए।
  • शाम के समय सूर्यास्त से एक घंटा पहले भगवान शिव के समक्ष मंत्रों  का जाप करें। तीसरे प्रहर पर भगवान शिव की पूजा विभिन्न फूलों, लाल चंदन, हवन और पंचामृत से करनी चाहिए।
  • शिवलिंग को जल से स्नान कराएं और बिल्व पत्र चढ़ाएं। देवी पार्वती, गणेश, कार्तिक और नंदी की भी पूजा करनी चाहिए।
  • प्रार्थना के दौरान दीपक जलाएं। ऐसा माना जाता है कि यह आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है।
  • इस दौरान मंत्र ॐ नमः शिवाय (महा मृत्युंजय मंत्र) का 108 बार जाप करें। ऐसे करने से बहुत सारे शुभ और लाभ मिलते हैं।
  • जिस दिन प्रदोष व्रत हो उस दिन के अनुसार प्रदोष व्रत कथा और शिव पुराण सुनें।
  • व्रत पारण के समय एक वस्त्र, भगववन शिव का चित्र और कुछ अन्य उपहार किसी ब्राह्मण को दान करें। 
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