हिंदू ग्रंथों में कार्तिक मास का विशेष महत्व बताया गया है। पूरे कार्तिक मास में स्नान, दान और पूजन का विशेष बताया गया है। स्वयं ब्रह्माजी कार्तिक मास की महिमा बताते हुए कहते हैं कि कार्तिक मास सब मासों में उत्तम है एवं महीनों में कार्तिक, देवताओं में भगवान विष्णु और तीर्थों में नारायण तीर्थ (बद्रिकाश्रम)श्रेष्ठ है। 'न कार्तिकसमो मासो न कृतेन समं युगं, न वेदं सदृशं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समं' अर्थात् कार्तिक के समान कोई मास नहीं है, न सतयुग के समान कोई युग, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं। इस महीने में तैंतीस कोटि देवता मनुष्य के सन्निकट हो जाते हैं और इसमें किए हुए स्न्नान, दान, भोजन, व्रत, तिल, धेनु, सुवर्ण, रजत, भूमि और वस्त्र आदि के दानों को विधिपूर्वक ग्रहण करते हैं। कार्तिक में जो कुछ दिया जाता है,जो भी तप किया जाता है उसे सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु ने अक्षय फल देने वाला बतलाया है। आइए जानते हैं कार्तिक मास में किन कार्यों को करने का अत्यधिक महत्व है।