Jamat ul Vida 2024: ईद-उल-फितर इस्लामिक कैलेंडर के 10वें महीने के पहले दिन मनाया जाता है। यह महीना रमजान के खत्म होने के बाद आता है। ईद से पहले रमजान के दौरान जमात-उल-विदा यानी आखिरी जुमे की नमाज का महत्व बड़ा माना गया है। 'जमात उल विदा' एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है जुम्मे की विदाई यानि रमजान का आखिरी शुक्रवार या जुमा। इस्लाम धर्म में जुमा यानी शुक्रवार का दिन खास माना गया है। जब जुमा का दिन रमजान के महीने में आता है, तो उसकी खासियत और भी बढ़ जाती है। खासतौर पर आखिरी जुमा खास माना जाता है। हदीस के मुताबिक, रमजान में इबादत और नेकी के बदले 70 गुना ज्यादा सवाब मिलता है। आज रमजान का आखिरी जुमा मनाया जा रहा है, जिसे अलविदा जुमा भी कहा जाता है। तो आइए जानें इसकी खासियत क्या है।