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Ganesh Chaturthi 2021: घर पर भगवान गणेश से जुड़ी इन बातों का रखें विशेष ध्यान, होगा सुख-समृद्धि का वास

Thu, 09 Sep 2021 11:21 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गणेश चतुर्थी 2021 वास्तुदोष: सर्वमंगल एवं बल-शक्ति की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी या लाल रंग के गणेशजी की आराधना अनुकूल रहती है - फोटो : Pixabay
भगवान श्रीगणेश विघ्न विनाशक हैं मंगलकारी हैं। जहां श्रीगणेश का नित पूजन-अर्चन होता है, वहां रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का वास होता है। वे विनायक हैं और जीवन में सुख,सफलता और समृद्धि की राह दिखाते हैं। वेदों में उनकी वंदना 'नमो गणेभ्यो गणपति'के उच्चारण से की गई है। वास्तु विज्ञान में सभी देवों में प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है एवं गजानन भवन के वास्तु दोषों को दूर करते हैं।

सुख-समृद्धि देंगे ऐसे गणेश
सर्वमंगल एवं बल-शक्ति की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी या लाल रंग के गणेशजी की आराधना अनुकूल रहती है,घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। सुख, शांति, समृद्धि की चाह रखने वालों को सफेद रंग के विनायक की मूर्ति लाना चाहिए। साथ ही घर में इनका एक स्थाई चित्र भी लगाना चाहिए। घर में पूजा के लिए गणेश जी की शयन या बैठी मुद्रा हो तो अधिक शुभ होती है। यदि कला या अन्य शिक्षा के प्रयोजन से पूजन करना हो तो नृत्य गणेश की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन लाभकारी है। ईशान कोण और पूर्व दिशा में सुखकर्ता की मूर्ति या चित्र लगाना शुभ रहता है वास्तुदोष दूर होते हैं।
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गणेश चतुर्थी - फोटो : Amar Ujala
घर के मुख्यद्वार पर
यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है।घर में बैठे हुए और बायीं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी विराजित करना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं और उनकी साधना-आराधना कठिन होती है। वे देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं। मंगल मूर्ति को मोदक और उनका वाहन मूषक अतिप्रिय है। इसलिए मूर्ति स्थापित करने से पहले ध्यान रखें कि मूर्ति या चित्र में मोदक या लड्डू और चूहा जरूर होना चाहिए। घर या कर्यालय में गणेशजी स्थापित करने से पूर्व यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋय कोण में नहीं होना चाहिए।
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गणेश चतुर्थी - फोटो : Pixabay
द्वारवेध के लिए
यदि भवन में द्वारवेध हो यानि दरवाजे से जुड़ा किसी भी तरह का वास्तुदोष हो (भवन के द्वार के सामने वृक्ष, मंदिर, स्तंभ, सड़क आदि के होने पर द्वारवेध माना जाता है)। ऐसे में घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी की बैठी हुई प्रतिमा लगानी चाहिए लेकिन उसका आकार 11 अंगुल से अधिक नहीं होना चाहिए।

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गणेश भगवान - फोटो : अमर उजाला
बनाएं स्वास्तिक
स्वस्तिक को गणेश जी का रूप माना जाता है। वास्तु शास्त्र भी दोष निवारण के लिए स्वास्तिक को उपयोगी मानता है। स्वास्तिक वास्तु दोष दूर करने का महामंत्र है एवं यह ग्रह शान्ति में लाभदायक है। भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिंदूर से दीवार पर स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है।
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Ganesh Chaturthi
इन बातों का रखें ध्यान
- घर में भगवान श्रीगणेश का चित्र लगाते समय ध्यान रखें कि चित्र में मोदक या लड्डू और चूहा अवश्य होना चाहिए। घर में भगवान श्रीगणेश की ज्यादा मूर्तियां या तस्वीर नहीं होनी चाहिए।
- गणेशजी को रोजाना दूर्वा दल अर्पित करने से लाभ की प्राप्ति होती है। दूर्वा चढ़ाकर समृद्धि की कामना से ऊं गं गणपतये नम: का पाठ लाभकारी माना जाता है,भवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी।
-रविवार या पुष्य नक्षत्र में आप श्वेतार्क गणेश की मूर्ति घर लेकर आएं और इनकी नियमित पूजा करें, इससे सभी रुके हुए काम बन जाएंगे। इसके अलावा क्रिस्टल से बनी हुई गणेश जी की प्रतिमा की पूजा करने से भी वास्तुदोष दूर होते हैं।
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