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पुत्रदा एकादशी : यदि जीवन से जुड़े हों ये 5 पाप तो नहीं पूरा होता कुलदीपक का सपना

Wed, 22 Aug 2018 06:58 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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जीवन की बगिया में एक स्वस्थ, सुंदर संतान का सपना हर दंपत्ति संजोए रखता है। खास तौर पर जब आपकी शादी के कुछ साल बीत गए हों और अभी तक आपकी ख्वाहिश नहीं पूरी हुई तो यह विचार आपको भीतर ही भीतर कचोटने लगता है। क्या कारण है तमाम चाहत ओर कोशिशों के बावजूद घर के आंगन में बच्चे की किलकारी नहीं गूंज पाती। आखिर क्यों होता है संतान प्राप्ति में विलंब और क्या है उसका उपाय? धार्मिक और ज्योतिष ग्रंथों में कुछ योगों और पापों की चर्चा की गई, जिनके कारण तमाम प्रयासों के बावजूद नहीं पूरा हो पाता कुलदीपक का सपना। आइए जाने वो पांच पाप और उनसे मुक्ति के सनातनी उपाय — 
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मातृशाप से संतान क्षय - 
पूर्व जन्म में या इस जन्म में आप मातृशाप से ग्रसित हैं तो निश्चित तौर पर आपको संतान से जुड़े कष्ट को भोगना ही पड़ेगा। शाप से मुक्ति के लिए पति व्यक्ति को रामेश्वरम् तीर्थ में जाकर स्नान करना चाहिए। साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार दूध से भरा चांदी का पात्र दान करना चाहिए। भक्ति-भाव से इस उपाय को करने से जातक को मातृशाप से मुक्ति मिल जाती है और स्वस्थ, सुंदर और चरित्रवान पुत्र की प्राप्ति का सपना साकार होता है। 
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भातृशाप से संतान क्षय
पूर्व या इस जन्म में भाई से मिला श्राप आपको संतान सुख से वंचित कर सकता है। इस शाप से मुक्ति के लिए पूरे भक्ति भाव से भगवान विष्णु की पूजा करें। श्री लक्ष्मी-नारायण की कथा का श्रवण करें। यमुना या कृष्णा नदी में विशेष रूप से स्नान करें। साथ ही पीपल का वृक्ष लगाएं और उसके बड़े होने तक निरंतर उसकी सेवा करें। श्रद्धापूर्वक ऐसा करने से निश्चित रूप से आपको भातृशाप से मुक्ति मिलेगी और कुलदीपक का सपना साकार होगा।

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ब्राह्मण शाप से संतान हीनता –
यदि आपने पूर्वजन्म या फिर इस जन्म में किसी ब्राह्मण शाप से पीड़ित हैं तो आपको इस शाप से मुक्ति के लिए चांद्रायण व्रत करना चाहिए। साथ ही यदि संभव हो तो  किसी योग्य ब्राह्मण को गाय का दान करना चाहिए। इस श्राप की मुक्ति से निश्चित रूप से जातक को सुयोग्य पुत्र की प्राप्ति होती है। 
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पत्नी के शाप से संतान क्षय – 
यदि आप पूर्व या इस जन्म में पत्नी के द्वारा दिए गए श्राप से पीड़ित हैं तो निश्चित रूप से आपको संतान सुख में तमाम तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। इस श्राप से मुक्ति के लिए व्यक्ति को श्री लक्ष्मीनारायण की प्रतिमा का विधिवत् पूजन करना चाहिए। गोदान एवं कन्यादान से भी इस श्राप से मुक्ति संभव है।
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प्रेतजनित शाप से संतानहीनता – 
कई बार संतान सुख में प्रेत बाधा की बात भी सामने आती है। यदि ऐसे लक्षण नजर आए या आभास हो तो इससे मुक्ति के लिए जातक को गया तीर्थ (बिहार) में विधिवत श्राद्ध करना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। गाय का दान करना चाहिए। अवश्य ही पुत्र प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। 
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