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Chanakya Niti: इन तीन गुणों वाली स्त्री को आचार्य चाणक्य ने माना है श्रेष्ठ

Wed, 03 Mar 2021 07:02 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य बहुत ही कुशाग्र बुद्धि के विद्वान थे आज भी उनकी गिनती श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। उन्हें विभिन्न विषयों की तो गहरी समझ थी ही वे व्यव्हारिक तौर पर भी बहुत कुशल थे। चाणक्य के बारे में कहा जाता है कि वे हर विषय की जानकारी रखते थे। चाणक्य एक योग्य शिक्षक थे। उन्होंने तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की थी और वहीं पर विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान भी की। आचार्य चाणक्य द्वारा नीतिशास्त्र में लिखी गई बातें मनुष्य के जीवन को बहुत ही करीब से स्पर्श करती हैं। चाणक्य ने मनुष्य के रिश्तों और स्वभाव के बारे में भी बताया गया है। इसी तरह से चाणक्य ने स्त्रियों में कुछ गुणों के बारे में बताया है जो एक स्त्री को श्रेष्ठ बनाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वे गुण।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
विनम्रता और दया 
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दया और विनम्रता ये दो उत्तम गुण हैं जिनसे क्रोध पर विजय प्राप्त की जा सकती है। दया और विनम्रता इन दोनों गुणों की स्त्री को श्रेष्ठ माना जाता है। इन गुणों से युक्त स्त्री सदैव सम्मान प्राप्त करती है। ऐसी स्त्री स्वयं के साथ अपने परिवार को सम्मान दिलाती है। ऐसी स्त्री अपने परिवार के रिश्तों को जोड़कर रखती है। जिस घर में ऐसी स्त्री होती है वहां पर हमेशा सुख का वास होता है। इन दोनों गुणों से युक्त स्त्री समाज में अन्य के लिए उदहारण होती है।
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Chanakya Success Mantra - फोटो : social media
धर्म का पालन करने वाली
धर्म परायण स्त्री कुल का नाम रोशन करती है। जो स्त्री धर्म का पालन करती है वह सम्मान का पात्र होती है। धर्म का पालन करने वाली स्त्री न केवल अपने परिवार को बल्कि पूरे समाज को सही राह दिखाती है। धर्म से युक्त स्त्री सही और गलत के भेद को समझती है। चाणक्य के अनुसार धर्म का पालन करने वाली स्त्री श्रेष्ठ होती है।
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Chanakya Success Mantra - फोटो : social media
धन का संचयन करने वाली स्त्री
जिस स्त्री में धन का संचय करने का गुण होता है वह बुरे वक्त में अपने परिवार की सुरक्षा करने में सक्षम होती है। धन का अत्यधिक व्यय करने वाली स्त्री के कारण पूरे परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विपत्ति पड़ने पर धन भी व्यक्ति को बुरे समय से निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए स्त्री में धन संचयन करने का गुण होना आवश्यक होता है।
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