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Ahoi ashtami 2021: आज है अहोई अष्टमी व्रत, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Thu, 28 Oct 2021 10:42 AM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
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अहोई अष्टमी 2021 - फोटो : self
हिंदी पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी Ahoi ashtami का व्रत किया जाता है। इस बार अहोई अष्टमी का व्रत 28 अक्टूबर 2021 दिन गुरुवार को रखा जाएगा। यह दिन महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, खुशहाल जीवन, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना के लिए व्रत करती हैं। इसके साथ जिन महिलाओं की संतान नहीं होती वे संतान प्राप्ति की कामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं। आम बोलचाल की भाषा में इस दिन को अहोई आठें ahoi athe भी कहा जाता है। दिवाली के आठ दिन पहले पड़ता है, आज से ठीक आठ दिनों बाद कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली diwali मनाई जाएगी। इस दिन माता अहोई, भगवान शंकर और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है और अहोई माता की कथा पढ़ी जाती है। वैसे तो ज्यादातर व्रत में सूर्य या चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है लेकिन अहोई अष्टमी पर तारों की अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
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अहोई अष्टमी 2021 - फोटो : self
अहोई अष्टमी का महत्व-
यह व्रत संतान की रक्षा हेतु किया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के कुशल-मंगल जीवन के लिए निर्जला उपवास करती हैं। मान्यता है कि इस दिन उपवास व पूजन करने से माता अहोई प्रसन्न होती है और संतान को लंबी आयु का वरदान देती हैं। इस व्रत में सेई का पूजन भी किया जाता है। कुछ महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना के साथ भी ये व्रत करती हैं। 

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अहोई अष्टमी 2021
अहोई अष्टमी 2021 शुभ मुहूर्त-
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी आरंभ- 28 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से 
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी समाप्त-29 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को दोपहर 02 बजकर 09 मिनट से 
अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 05 बजकर 39 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट तक है। पूजा का समय कुल मिलाकर 01 घंटा 17 मिनट रहेगा। 
तारों को देखने का संभावित समय- शाम को 06 बजकर 03 मिनट पर

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ahoi ashtami 2021
अहोई अष्टमी पूजा विधि-
  • इस दिन महिलाएं प्रातः जल्दी ऊषाकाल में ही उठ जाती हैं और स्नानादि करके व्रत का संकल्प लेती हैं।
  • पूजा के शुभ मुहूर्त में दीवार पर अहई माता की तस्वीर बनाई जाती है और साथ में सेई और सेई के बच्चों की तस्वीर भी बनाई जाती है।
  • इसके बाद रोली,फल,  फूल आदि अर्पित करके माता अहोई का पूजन किया जाता है।
  • एक कलश में जल भरकर उसे चौकी पर रखकर अहोई अष्टमी की कथा का श्रवण किया जाता है।
  • महिलाएं संतान को पास में बिठाकर उसे अपने पल्लू की छांव में करके कथा सुनती हैं।
  • अहोई माता को पूरी और हलवा या फिर किसी मिष्ठान का भोग लगाया जाता है।
  • पूजा पूर्ण होने के बाद तारों का दर्शन करके अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
  • अहोई अष्टमी पर महिलाएं चांदी के मोती की माला भी बनाती हैं, जिसमें अहोई माता का लॉकेट पड़ा होता है।
  •  हर साल इस माला में दो मोती और जोड़ दिए जाते हैं, इसको स्याउ कहा जाता है। 
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अहोई अष्टमी व्रत नियम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
अहोई अष्टमी व्रत नियम-
इस व्रत में किसी भी तरह से धारदार चीजों का उपयोग करना मना होता है जैसे व्रत रखने वाली महिला चाकू से सब्जी आदि भी नहीं काट सकती हैं।
अहोई के दिन बनाई गई चांदी के मोती की माला को महिलाएं दीपावली तक अपने गले में पहनती हैं।
दिवाली का पूजन करने के बाद अगले दिन इस माला को उतार कर संभाल कर रख देना चाहिए।
इस दिन व्रत पारण करते समय या दिन में,  कोई सफेद चीज जैसे चावल, दूध, दही आदि का सेवन करना वर्जित माना जाता है।
 पूजन के बाद किसी बुजुर्ग महिला को वस्त्र आदि भेंट करके आशीर्वाद लेना चाहिए।

 
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