फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुराणों में बताए गए इन नियमों का करेंगे पालन, तभी बनेंगे धनवान और सुखी

Thu, 01 Oct 2020 06:14 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
puja ghar
शास्त्रों और पुराणों में अच्छा जीवन जीने के लिए कई तरह के नियम बताए गए हैं। इन उपायों का अनुसरण कर व्यक्ति जीवन को सरल और सुखी बना सकता है। जीवन को सुखी और समृद्धिशाली बनाने के लिए पुराणों में क्या-क्या नियम बताए गए हैं आइए जानते हैं...

राशिनुसार जानिए अक्तूबर महीने में क्या कहते हैं भाग्य के सितारे, इस दिन रहें जरा बचके...
विज्ञापन

2 of 7
Shattila Ekadashi
शास्त्रों में बताया गया है कि व्यक्ति को कुछ तिथियों पर विशेष सावधानी और निययों का पालन करना चाहिए। व्यक्ति को हर महीने की अष्टमी, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और चतुर्दशी तिथि पर भगवान की पूजा-आराधना जरूर करनी चाहिए। इन तिथियों पर व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। ऐसे में भूलकर भी इस तिथि पर न तो मांसाहार का सेवन करें और न ही शरीर पर तेल की मालिश करनी चाहिए। यह सभी तिथि बहुत ही शुभ मानी गई हैं।
विज्ञापन

3 of 7
शालिग्राम
भगवान की आराधना करने से ही मनुष्य भगवान को अपने करीब पाता है। ऐसे में पूजा-पाठ करते समय भूलकर भी देवी-देवताओं की मूर्तियों को, शंख, पूजा सामग्री, शालिग्राम और दीपक को अशुद्ध जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इन सभी चीजों को जमीन पर रखने से पहले लाल कपड़ा बिछाकर किसी साफ और ऊंचे स्थानों पर रखना चाहिए।

4 of 7
पुराणों में बताया गया है कि कभी किसी पुरुष को पराई महिलाओं की तरफ बुरी नजर से नहीं देखना चाहिए और न ही किसी महिला का अपमान करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव की कमी होने लगती है। पराई चीजों को अपनी समझने पर धीरे-धीरे दरिद्रता बढ़ने लगती है। 
विज्ञापन

5 of 7
शास्त्रों में बताया गया है कि कभी भी सूर्य और चंद्रमा के अस्त होते समय उसे निहारना नहीं चाहिए। ऐसा करने से जीवन में नकारात्मकता हावी होने लगती है। जहां एक तरफ सूर्य को उदय होते हुए देखने पर जीवन में सकारात्मकता और सफलता प्राप्त होती है। वहीं अस्त होते हुए सूर्य को देखना पर निराशा का भाव जागता है।
विज्ञापन

6 of 7
शास्त्रों में दान का विशेष महत्व बताया गया है। दान करने से भगवान की कृपा मिलती है। इसके अलावा समय-समय पर दान करने से कुंडली में अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है। अगर दान का आपने संकल्प किया है उसे उसी तिथि पर करना चाहिए जिस तिथि पर दान देना का प्रण लिया है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
भगवान विष्णु - फोटो : अमर उजाला।
पुराणों में बताया गया है जितना महत्व रोजाना पूजा-पाठ और आराधना का होता है उतना ही घर और समाज में रहने वाले लोगों को सम्मान देने का महत्व होता है। ऐसे में कभी भी अपने से बड़े लोगों, माता-पिता , गुरुजन, गरीब और असहाय व्यक्तियों के साथ महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए। इन सभी का अपमान करने पर मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें