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चंद्र दर्शन का पौराणिक महत्व
शास्त्रों में उल्लेख है कि सौभाग्य,संतान,धन-धान्य,पति की रक्षा और संकट टालने के लिए चंद्रदेव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सूर्योदय से शुरू होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद पूर्ण होता है। इस दिन चंद्रोदय होने पर लोटे में जल भरकर उसमें लाल चन्दन,कुश ,पुष्प,अक्षत,शक्कर आदि डालकर चन्द्रमा को यह बोलते हुए अर्घ्य दें-'गगन रुपी समुद्र के माणिक्य चन्द्रमा ! दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम ! गणेश के प्रतिविम्ब !आप मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए'। चन्द्रमा को दिया हुआ यह दिव्य व पापनाशक अर्घ्य सौभाग्य में वृद्धि करता है।इस प्रकार कल्याणकारी विनायक चतुर्थी व्रत का पालन करके मनुष्य धन-धान्य से संपन्न होता है।वह कभी कष्ट में नहीं पड़ता। चंद्रमा को अर्घ्य देने से कुंडली में चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है।धर्मग्रंथों के अनुसार कलंक चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए,क्यों कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से झूठा कलंक लगता है।