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दशहरा 2026: कब है विजयादशमी पर्व? जानिए तारीख, पूजा मुहूर्त और महत्व

Wed, 30 Sep 2026 01:18 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस साल दशहरा 19 अक्टूबर या 20 अक्टूबर को लेकर लोगों में असमंजस है। आइए जानते हैं 2026 में विजयादशमी की सही तारीख, रावण दहन का समय और इस पर्व का धार्मिक महत्व।
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कब है दशहरा - फोटो : अमर उजाला

Dussehra 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है। यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। दशहरे के दिन देशभर में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। हालांकि, इस बार दशमी तिथि दो दिनों में पड़ने के कारण दशहरा मनाने की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है। आइए जानते हैं 2026 में दशहरा किस दिन मनाया जाएगा और विजय मुहूर्त कब रहेगा।
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कब है दशहरा? - फोटो : Adobe Stock

कब है दशहरा?
पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदयातिथि और विजय मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। दशहरे के दिन विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि को विजयादशमी के दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसी दिन परंपरा के अनुसार रावण दहन भी किया जाएगा।

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क्यों मनाया जाता है विजयादशमी? - फोटो : Adobe Stock

क्यों मनाया जाता है विजयादशमी?
विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के पर्व के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में हर साल दशहरे का पर्व मनाने की परंपरा है। नवरात्रि के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में रामलीला का मंचन किया जाता है। नौ दिनों तक भगवान राम के जीवन और रावण के साथ उनके युद्ध की कथा का मंचन होने के बाद दशमी तिथि पर रावण वध और पुतला दहन किया जाता है।
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दशहरा पर होता है रावण दहन - फोटो : Adobe Stock

दशहरा पर होता है रावण दहन
विजयादशमी के अवसर पर देशभर में कई जगह बड़े स्तर पर रावण दहन का आयोजन होता है। रावण के साथ उसके भाई कुंभकरण और पुत्र मेघनाद के पुतलों का भी दहन किया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग रामलीला मैदानों और आयोजन स्थलों पर पहुंचते हैं। कई स्थानों पर दशहरे के अवसर पर मेले भी लगाए जाते हैं।

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दशहरे पर दुर्गा विसर्जन की भी परंपरा - फोटो : Adobe Stock

दशहरे पर दुर्गा विसर्जन की भी परंपरा
विजयादशमी का संबंध केवल राम-रावण की कथा से ही नहीं है। इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन की भी परंपरा है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल समेत कई क्षेत्रों में विजयादशमी के दिन दुर्गा पूजा के समापन के बाद मां दुर्गा को विधि-विधान से विदाई दी जाती है। इस तरह विजयादशमी धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्व है, जो लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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