फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pitru Paksha 2023: 16 दिन के ही क्यों होते हैं पितृपक्ष ? जानें तर्पण का महत्व और इसके लाभ

Fri, 29 Sep 2023 12:24 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 7
Pitru Paksha 2023 - फोटो : अमर उजाला
Pitru Paksha 2023 Date: पितृ पक्ष या श्राद्ध/श्राद्ध, हिंदुओं द्वारा अपने पूर्वजों को याद करने के लिए 15 दिनों का एक अनुष्ठान है। पितृ पक्ष के दौरान, मृतक का सबसे बड़ा पुत्र पितृलोक (स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का क्षेत्र) में रहने वाले पूर्वजों के लिए तर्पण करके श्राद्ध करता है। पितृ पक्ष या श्राद्ध भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दौरान शुरू होता है और 29 सितंबर, 2023 को शुरू होने वाला है। पितृ पक्ष 14 अक्टूबर, 2023 को कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि या सर्व पितृ अमावस्या पर समाप्त होगा। आइए जानते हैं  पितृ पक्ष कब से आरंभ हो रहा है। 
Mangal Asta 2023: सेनापति मंगल 24 सितंबर को होंगे अस्त, इन राशियों पर पड़ेगा शुभ-अशुभ प्रभाव
Rahu-Ketu Gochar 2023: 30 अक्टूबर को राहु-केतु करेंगे राशि परिवर्तन, इन राशियों को रहना होगा सावधान
04 नवंबर को कुंभ राशि में होंगे शनिदेव मार्गी, इन राशि वालों पर रहेगी शनि की विशेष कृपा, चमक उठेगा भाग्य
विज्ञापन

2 of 7
Pitru Paksha 2023
पितृ पक्ष 2023 आरंभ तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल 29 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है, इसका समापन आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होता है। अमावस्या तिथि इस बार 14 अक्टूबर को पड़ रही है। 
विज्ञापन

3 of 7
Pitru Paksha 2023 - फोटो : अमर उजाला
15 दिन देरी से क्यों शुरू होंगे पितृपक्ष
पितृपक्ष अश्विन अमावस्या पर खत्म होते हैं, इसे सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं। इस वर्ष अधिक मास की वजह से इस साल सावन दो महीने का था जिस वजह से  सभी व्रत-त्योहार 12 से 15 दिन देरी से पड़ेंगे। आमतौर पर पितृ पक्ष सितंबर में समाप्त हो जाते हैं लेकिन इस साल पितृ पक्ष सितंबर के अंत में आरंभ होकर अक्टूबर के मध्य तक चलेंगे। 

4 of 7
Pitru Paksha 2023 - फोटो : अमर उजाला
पितृ पक्ष 2023: महत्व
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, हमारी पिछली तीन पीढ़ियों की आत्माएं 'पितृ लोक' में रहती हैं, जिसे स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का क्षेत्र कहा जाता है। इस क्षेत्र का नेतृत्व मृत्यु के देवता यम करते हैं। ऐसा माना जाता है जब ऐसा माना जाता है कि जब अगली पीढ़ी का कोई व्यक्ति मर जाता है, तो पहली पीढ़ी को भगवान के करीब लाते हुए स्वर्ग ले जाया जाता है। पितृलोक में केवल अंतिम तीन पीढ़ियों को ही श्राद्ध कर्म दिया जाता है।
विज्ञापन

5 of 7
Pitru Paksha 2023 - फोटो : अमर उजाला
पितृपक्ष में श्राद्ध करना क्यों जरूरी 
पितृपक्ष में अपने-अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध किया जाता है । मान्यता है कि जो लोग पितृपक्ष में पितरों का तर्पण नहीं करते उन्हें पितृदोष लगता है।  श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को तृप्ति और शांति मिलती है।  वे आप पर प्रसन्न होकर पूरे परिवार को आशीर्वाद देते हैं। हर साल लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए गया जाकर पिंडदान करते हैं। 
विज्ञापन

6 of 7
Pitru Paksha 2023 - फोटो : अमर उजाला
16  दिन के ही क्यों होते हैं श्राद्ध 
शास्त्रों के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु इन सोलह तिथियों के अलावा अन्य किसी भी तिथि पर नहीं होती है। यानी कि जब भी पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है तो उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार ही करना चाहिए । इसलिए पितृ पक्ष सर्फ सोलह दिन के होते हैं। हालांकि जब तिथि क्षय होता है तब श्राद्ध के दिन 15 भी हो जाते हैं लेकिन बढ़ते कभी नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
Pitru Paksha 2023
कैसे करे श्राद्ध
  • श्राद्ध का काम गया में या किसी पवित्र नदी के किनारे भी किया जा सकता है।
  • इस दौरान पितरों को तृप्त करने के लिए पिंडदान और ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है।
  • अगर इन दोनों में से किसी जगह पर आप नहीं कर पाते हैं तो किसी गौशाला में जाकर करना चाहिए। 
  • घर पर श्राद्ध करने के लिए सुबह सूर्योदय से पहले नहा लीजिए।  
  • इसके बाद साफ कपड़े पहनकर श्राद्ध और दान का संकल्प कीजिए।  
  • जब तक श्राद्ध ना हो जाए तो कुछ भी ना खाएं। 
  • वहीं, दिन के आठवें मुहूर्त में यानी कुतुप काल में श्राद्ध कीजिए जो कि 11 बजकर 36 मिनट से  12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। 
  • दक्षिण दिशा में मुंह रखकर बाएं पैर को मोड़कर और घुटने को जमीन पर टिकाकर बैठ जाएं।  
  • इसके बाद तांबे के लोटे में जौ, तिल, चावल, गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, सफेद फूल और पानी डालें। 
  • हाथ में कुश लेकर और दल को हाथ में भरकर सीध हाथ के अंगूठे से उसी बरत्न में 11 बार गिराएं।  
  • फिर पितरों के लिए खीर अर्पित करें। 
  • इसके बाद देवता, गाय, कु्त्ता, कौआ और चींटी के लिए अलग से भोजन निकालकर रख दीजिए।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें